राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने चुनाव में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों को कड़े निर्देश दिए हैं। संवेदनशील केंद्रों की निगरानी और अवैध शराब-नकदी पर रोक के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है।

चंडीगढ़। प्रदेश में आगामी नगर निकाय (Municipal Bodies) और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने पंचकूला में हुई एक अहम बैठक में स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने चुनाव को पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के लिए ‘सुपर विजिलेंस’ की रणनीति तैयार की है। इसके तहत सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों को जमीन पर उतरकर हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और खर्च पर कड़ी घेराबंदी

चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए संवेदनशील मतदान केंद्रों (Sensitive Polling Stations) पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों के चुनावी खर्च (Election Expenditure) पर लगाम कसने के लिए व्यय पर्यवेक्षक हर तीन दिन में हिसाब-किताब की जांच करेंगे। प्रचार सामग्री, वाहन, ईंधन और विज्ञापन का सारा लेखा-जोखा निर्धारित सीमा के भीतर होना अनिवार्य है। साथ ही, मतदाताओं को लुभाने के लिए बांटी जाने वाली नकदी, शराब या अन्य उपहारों (Allurements) पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने नाकेबंदी और गश्त तेज कर दी है। EVM की सुरक्षा और रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया भी अब सीधे पर्यवेक्षकों की निगरानी में होगी।

जनता की शिकायत पर तुरंत एक्शन की तैयारी

आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को जनता के करीब लाने के लिए एक विशेष शिकायत निवारण व्यवस्था (Grievance Redressal) तैयार की है। पर्यवेक्षकों के मोबाइल नंबर और उनके ठहरने की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, ताकि कोई भी नागरिक या उम्मीदवार सीधे उनसे संपर्क कर सके। आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य (Disqualification) घोषित किया जा सकता है। निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पर्यवेक्षकों की सक्रियता से ही लोकतंत्र में जनता का विश्वास मजबूत होगा। मतगणना और परिणाम प्रक्रिया में भी पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए कड़े अनुशासन के निर्देश दिए गए हैं।