Haryana Jail Visitor Boards : चंडीगढ़। हरियाणा की जेलों में बंद कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए नायब सिंह सैनी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की सभी 20 जेलों में जिला स्तरीय विजिटर बोर्ड गठित किए गए हैं। ये बोर्ड जेलों की व्यवस्थाओं, कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर निगरानी रखेंगे।

सरकार ने इन बोर्डों का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मॉडल प्रिजन मैनुअल-2016 के प्रावधानों के तहत किया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। बोर्ड में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों, मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी जगह दी गई है।

विधायक और महिला सामाजिक कार्यकर्ता भी होंगी शामिल

विजिटर बोर्ड में जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला रोजगार अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, जिला उद्योग अधिकारी और शिक्षा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी सदस्य रहेंगे। इसके अलावा जनस्वास्थ्य, लोक निर्माण और कृषि एवं बागवानी विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नामित तीन विधायक भी बोर्ड का हिस्सा होंगे। इनमें कम से कम एक महिला विधायक का होना जरूरी है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की ओर से नामित प्रतिनिधि को भी सदस्य बनाया जाएगा।

40 गैर-सरकारी सदस्य किए गए नामित

जेलों की निगरानी व्यवस्था में सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले से दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को गैर-सरकारी सदस्य बनाया गया है। इनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। इस तरह कुल 40 गैर-सरकारी विजिटर नामित किए गए हैं।

हर तीन महीने में जेल का दौरा करना होगा

विजिटर बोर्ड के सदस्यों को संबंधित जेल का निरीक्षण करने के लिए प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार दौरा करना होगा। निरीक्षण के लिए बोर्ड का कोरम अध्यक्ष और तीन सदस्यों की मौजूदगी से पूरा होगा।

गैर-सरकारी सदस्यों का कार्यकाल दो साल निर्धारित किया गया है। हालांकि, जेल निरीक्षण के लिए उन्हें किसी तरह का यात्रा भत्ता, मानदेय या अन्य पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा।

सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य जेलों में कैदियों के अधिकारों की रक्षा के साथ प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना है। नियमित निरीक्षण के जरिए जेलों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर बाहरी निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।

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