मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 और ऑटो म्यूटेशन प्रणाली की शुरुआत की है, जिससे अब जमीन की रजिस्ट्री होते ही इंतकाल स्वतः दर्ज हो जाएगा। इस नई पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के तहत बिना खेवट विभाजन वाले मामलों में महज 24 घंटे के भीतर इंतकाल को मंजूरी मिल जाएगी।

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देते हुए ‘हरियाणा निवास’ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में ऑटो म्यूटेशन प्रणाली और Haryana Paperless Registration Phase Two का रिमोट का बटन दबाकर औपचारिक शुभारंभ किया। इस तकनीकी सुधार के लागू होने से अब प्रदेशवासियों को जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद इंतकाल (दाखिल-खारिज) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही अलग से आवेदन करना होगा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, रणबीर गंगवा और अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमित्रा मिश्रा सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के उपायुक्त भी जुड़े। सरकार की यह आधुनिक पहल सीधे तौर पर आम नागरिकों और किसानों के समय तथा धन की बचत करेगी।

आधार ई-केवाईसी से मिलेगी पूरी सुरक्षा

नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब रजिस्ट्री की पूरी आवेदन प्रक्रिया को पहले के मुकाबले काफी सरल, सुरक्षित और आम जनता के अनुकूल बनाया गया है। जमीन की खरीद-फरोख्त करने वाले दोनों पक्षों के लिए अब आधार कार्ड आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म होगी। जमीन के मालिक अब स्वयं, डीड राइटर, हेल्पडेस्क या किसी अधिवक्ता की मदद से ऑनलाइन माध्यम से अपने दस्तावेज आसानी से भर सकेंगे। इसके अलावा पोर्टल पर जमीन की श्रेणी और स्टाम्प ड्यूटी के नियमों की सटीक जानकारी अपने आप स्क्रीन पर दिखाई देगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए पारदर्शिता आएगी।

महज चौबीस घंटे में स्वीकृत होगा इंतकाल

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन जमीनी मामलों में खेवट विभाजन या पारिवारिक बंटवारे की जरूरत नहीं होगी, उनमें रजिस्ट्री के महज 24 घंटे के भीतर ही स्वतः इंतकाल स्वीकृत कर दिया जाएगा। वहीं जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता होगी, उनका निपटारा भी अधिकतम 10 दिनों की समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य में पहले से लंबित पड़े करीब 6 लाख इंतकाल के मामलों में से 4 लाख का समाधान किया जा चुका है और इस नई व्यवस्था से बचे हुए मामलों की फाइलें भी तेजी से बंद होंगी। पूरी तरह ऑनलाइन ट्रैकिंग होने से अब आम नागरिक घर बैठे ही अपने इंतकाल का स्टेटस देख सकेंगे और डिजिटल कॉपी का प्रिंट आउट निकाल सकेंगे।