चंडीगढ़। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी बैंक कॉल, निवेश के नाम पर ठगी और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले साइबर अपराध लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराधों पर लगाम कसने के साथ-साथ आम लोगों को जागरूक करने का अभियान भी तेज कर दिया है। पिछले छह महीनों के दौरान राज्यभर में हजारों जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लाखों नागरिकों को साइबर ठगी से बचने के तरीके बताए गए।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में साइबर सुरक्षा को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जनवरी से जून 2026 के बीच हरियाणा पुलिस ने स्कूलों, कॉलेजों, बस अड्डों, बाजारों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कुल 1,322 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन अभियानों के माध्यम से लगभग 3.14 लाख लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी साझा करने के खतरे, डिजिटल अरेस्ट, निवेश घोटाले, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले साइबर अपराधों से बचाव के बारे में जागरूक किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि केवल जागरूकता अभियान ही नहीं, बल्कि साइबर अपराधों के मामलों के निपटान में भी हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। समन्वय पोर्टल पर अन्य राज्यों से प्राप्त 8,872 अनुरोधों में से 8,625 का सफल निपटान किया गया है। 97 प्रतिशत से अधिक की यह दक्षता विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित कार्रवाई और प्रभावी जांच व्यवस्था को दर्शाती है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि साइबर कमांडो प्रशिक्षण कार्यक्रम के अगले चरण के लिए अन्य अधिकारियों को भी पात्र घोषित किया गया है। इससे साइबर अपराधों की जांच और तकनीकी क्षमता को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि बदलते डिजिटल अपराधों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।हरियाणा पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी व्यापक उपयोग कर रही है। समय-समय पर साइबर ठगी के नए तरीकों, अपराधियों के बदलते हथकंडों और उनसे बचने के उपायों से संबंधित एडवाइजरी जारी की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य है कि लोग किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेनदेन से पहले सतर्क रहें और समय रहते साइबर अपराध का शिकार होने से बच सकें।

बैठक में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव , पुलिस महानिदेशक , गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।