चंडीगढ़ | हरियाणा में पिछले दो दिनों से चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विद्युत मंत्री अनिल विज के साथ संयुक्त कार्य समिति की हुई सकारात्मक बातचीत के बाद कर्मचारी यूनियनों ने हड़ताल वापस लेने का ऐलान कर दिया। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि राज्य भर में ठप पड़ी बिजली आपूर्ति को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाएगा।

निजी कंपनियों को प्रवेश न देने का मिला ठोस आश्वासन

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि राज्य के विद्युत क्षेत्र में निजी कंपनियों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही निजी कंपनी को जारी किए गए समानांतर विद्युत वितरण (Parallel Distribution) लाइसेंस को भी रद्द किया जाएगा। मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार शुरू से ही हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के इस फैसले के विरोध में रही है और कर्मचारी यूनियनों के साथ मजबूती से खड़ी है।

HERC को फैसला रद्द करने का निर्देश, 3 नवंबर को अगली बैठक

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ‘विद्युत अधिनियम’ की धारा 108 के तहत HERC को इस फैसले की समीक्षा करने और इसे रद्द करने का आधिकारिक निर्देश दे दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों द्वारा हड़ताल वापस लेने के संवेदनशील फैसले का स्वागत किया। इसके अलावा, कर्मचारियों के अन्य लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए आगामी 3 नवंबर को अगली उच्चस्तरीय बैठक तय की गई है।

15 जिलों में गहराया था संकट, पावर प्लांट की इकाइयां हुई थीं बंद

उल्लेखनीय है कि गुरुवार से शुरू हुई इस हड़ताल का असर राज्य के 15 जिलों में व्यापक रूप से देखा गया। हिसार, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद, सोनीपत और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में बिजली और पानी का संकट गहराने पर लोग सड़कों पर उतर आए थे। हड़ताल के कारण कुरुक्षेत्र और कैथल की बार एसोसिएशनों ने कामकाज ठप कर दिया था, वहीं पानीपत थर्मल पावर प्लांट की दो इकाइयां भी बंद करनी पड़ी थीं।

क्या था HERC का विवादित फैसला?

हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को अपने एक आदेश में ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस दिया था। यह लाइसेंस ‘विद्युत अधिनियम, 2003’ की धारा 14 के तहत जारी किया गया था। HERC तीन सदस्यीय वैधानिक निकाय है, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार की चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।

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