सोनीपत। हरियाणा में रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों को नवंबर में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों और विभाग के निजीकरण की आशंकाओं को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। सांझा मोर्चा हरियाणा के आह्वान पर 5 और 6 नवंबर को प्रदेशभर में रोडवेज बसों का चक्का जाम करने का ऐलान किया गया है। इस दौरान सोनीपत समेत प्रदेश के सभी डिपो के कर्मचारी दो दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे।

मंगलवार को सोनीपत में रोडवेज कर्मचारियों ने आंदोलन की तैयारियों और आगामी रणनीति को लेकर बैठक की। इसमें कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि हड़ताल के दौरान कोई भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटेगा। इसके साथ ही विभिन्न जिला मुख्यालयों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपनी मांगों को बुलंद किया जाएगा।

10 प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की तैयारी

सांझा मोर्चा हरियाणा के वरिष्ठ सदस्य मनजीत पहल ने बताया कि रोडवेज कर्मचारियों की करीब 10 प्रमुख मांगें लंबे समय से सरकार के समक्ष रखी जा रही हैं। इस संबंध में सरकार के साथ कई बार वार्ता भी हुई, लेकिन हर बार बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को लगातार लंबित रखा जा रहा है। इसी के चलते अब प्रदेशव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया गया है।

अनिल विज की बैठक में शामिल नहीं होगा सांझा मोर्चा

कर्मचारियों ने बताया कि परिवहन मंत्री अनिल विज की ओर से बैठक बुलाए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन सांझा मोर्चा ने इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन मांगों पर अमल नहीं हुआ। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत के लिए आमंत्रित किए जाने पर मोर्चा वार्ता में शामिल होने को तैयार है।

3500 बसों के बेड़े के दावे पर उठाए सवाल

सांझा मोर्चा के सदस्य अनिल आंतिल ने कहा कि सरकार प्रदेश में हरियाणा रोडवेज के बेड़े में 3500 बसें होने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों में अपनी मांगों को लेकर काफी नाराजगी है और इस बार सभी डिपो के कर्मचारी एकजुट होकर हड़ताल में हिस्सा लेंगे।

यात्रियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

5 और 6 नवंबर को प्रस्तावित हड़ताल का असर प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि सभी डिपो के कर्मचारी आंदोलन में शामिल होते हैं तो इन दो दिनों में रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को सफर से पहले बसों की उपलब्धता की जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।