दशहरे तक महज 9 घटनाएं, अब आंकड़ा पहुंचा 42 पर; रविवार को भी सात जगहों पर जले फसल अवशेष, धान कटाई की रफ्तार पर बारिश का ब्रेक

हरियाणा में धान की कटाई के साथ ही खेतों में फसल अवशेष निपटाने की चुनौती भी बढ़ने लगी है। दशहरे तक पराली जलाने की घटनाएं इक्का-दुक्का थीं, लेकिन त्योहार के बाद अचानक इनका ग्राफ ऊपर चढ़ने लगा। महज 12 दिनों के भीतर प्रदेश में पराली जलाने के 33 नए मामले सामने आए हैं। रविवार को सात और घटनाएं दर्ज होने के बाद चालू सीजन में कुल मामलों की संख्या 42 तक पहुंच गई है। आंकड़े बता रहे हैं कि खेतों में कटाई का काम आगे बढ़ने के साथ पराली जलाने की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अक्टूबर यानी दशहरे तक पूरे प्रदेश में पराली जलाने की सिर्फ नौ घटनाएं दर्ज हुई थीं। इसके बाद 21 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच घटनाओं में तेजी आई और 33 नए मामले सामने आ गए। इस सीजन में 28 और 31 अक्टूबर सबसे ज्यादा घटनाओं वाले दिन रहे। इन दोनों तारीखों पर प्रदेश के छह-छह स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई।

पलवल सबसे आगे, कैथल भी पीछे नहीं

जिलों की स्थिति देखें तो पलवल में पराली जलाने के सर्वाधिक सात मामले दर्ज किए गए हैं। कैथल पांच घटनाओं के साथ दूसरे स्थान पर है। रविवार को हांसी और अंबाला में दो-दो स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए। अंबाला जिले के अंबाला और साहा क्षेत्र में घटनाएं चिह्नित की गईं। वहीं जींद के पीलूखेड़ा, कैथल के पुंडरी और कुरुक्षेत्र के बबैन में भी एक-एक मामला दर्ज हुआ।

कैथल में किसान पर 5 हजार रुपये का जुर्माना

पराली जलाने के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। कैथल जिले के नागल गांव में किसान जितेंद्र सिंह के खेत में फसल अवशेष जलाने की पुष्टि होने पर विभाग ने पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पहले जिले के मटौर गांव में भी पराली जलाने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

बारिश ने रोकी धान कटाई की रफ्तार, अभी आधी से कुछ ज्यादा फसल ही कटी

एक तरफ पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ बारिश किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही है। प्रदेश में तीन बार हुई बारिश के चलते धान की कटाई का काम प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में कुल 59.87 प्रतिशत धान की कटाई पूरी हो पाई है।

बासमती धान की कटाई की स्थिति और धीमी है। इसकी अब तक 43.96 प्रतिशत फसल ही कट पाई है, जबकि गैर-बासमती धान की कटाई 66.15 प्रतिशत तक पहुंची है।

कुल मिलाकर प्रदेश में इस समय किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। बारिश के कारण कटाई में देरी हो रही है और कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों का निपटान भी बड़ा सवाल बना हुआ है। आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण और धान कटाई की रफ्तार, दोनों ही कृषि विभाग के लिए अहम चुनौती रहने वाले हैं।