Haryana Vehicle Registration 2026 : चंडीगढ़। हरियाणा में निजी और व्यावसायिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 46 लाख से अधिक नए वाहन पंजीकृत हुए हैं। वाहन खरीदने की बढ़ती क्षमता, बैंकों से मिलने वाला आसान कर्ज और निजी आवागमन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। वाहनों की बढ़ती संख्या से जहां सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं पंजीकरण से सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी इजाफा हुआ है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से अक्टूबर 2026 तक हरियाणा में कुल 46,03,706 नए वाहनों का पंजीकरण हुआ। प्रदेश में हर महीने औसतन करीब 93 हजार वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। इनमें लगभग 10 प्रतिशत व्यावसायिक वाहन हैं, जबकि शेष में निजी इस्तेमाल के वाहन प्रमुख हैं।
2026 में अब तक 9.49 लाख वाहनों का पंजीकरण
हरियाणा में वाहन खरीदने की रफ्तार वर्ष 2026 में भी बनी हुई है। अक्टूबर का महीना पूरा होने से पहले ही प्रदेश में 9,49,393 नए वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत तक यह आंकड़ा करीब 9.20 लाख था। इस तरह चालू वर्ष में अब तक पंजीकरण की संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि से अधिक दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में हरियाणा में 10,81,113 वाहनों का पंजीकरण हुआ था। वर्ष 2024 में 9,96,162, वर्ष 2023 में 8,35,626 और वर्ष 2022 में 7,39,412 वाहन पंजीकृत किए गए थे।
वाहन पंजीकरण की वृद्धि दर वर्ष 2024 में 19.21 प्रतिशत रही थी, जबकि 2025 में यह 8.53 प्रतिशत दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2026 के बाकी महीनों में भी नए वाहनों के पंजीकरण में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
गुरुग्राम और फरीदाबाद में सबसे ज्यादा वाहन
प्रदेश के बड़े शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में वाहन खरीदने का रुझान अधिक दिखाई दे रहा है। वर्ष 2026 में अब तक गुरुग्राम और फरीदाबाद नए वाहनों के पंजीकरण में सबसे आगे रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, एचआर-23 गुरुग्राम में 83,429 और एचआर-51 फरीदाबाद में 41,210 वाहनों का पंजीकरण हुआ। इसके बाद एचआर-6 पानीपत में 32,504, एचआर-29 बल्लभगढ़ में 25,380 और एचआर-2 जगाधरी में 17,631 वाहन पंजीकृत किए गए।
इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों, शहरी विस्तार और आबादी में बढ़ोतरी के चलते आवागमन की जरूरतें बढ़ रही हैं। इसका असर निजी वाहनों की मांग पर भी दिखाई दे रहा है।
क्यों बढ़ रही है गाड़ियों की मांग?
हरियाणा में वाहनों की संख्या बढ़ने के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। परिवारों का आकार और रहन-सहन बदलने से निजी वाहनों की जरूरत बढ़ी है। एकल परिवारों में अलग-अलग सदस्यों के आवागमन के लिए वाहन की मांग अधिक हो सकती है।
इसके अलावा, बैंक और वित्तीय संस्थान वाहन खरीदने के लिए कर्ज उपलब्ध कराते हैं। इससे खरीदारों को पूरी रकम एक साथ खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। आसान वित्तीय विकल्पों के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ रही है।
सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता, सुविधा और आवागमन के खर्च का भी वाहन खरीदने के फैसले पर असर पड़ता है। कई लोग रोजाना यात्रा के लिए निजी वाहन को सुविधाजनक विकल्प मानते हैं। यही कारण है कि प्रदेश में निजी वाहनों की हिस्सेदारी प्रमुख बनी हुई है।
वाहन पंजीकरण से सरकार को कितना राजस्व मिला?
वाहनों की खरीद बढ़ने के साथ पंजीकरण से मिलने वाले सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में वाहन पंजीकरण से 32,41,51,82,863 रुपये का राजस्व मिला था। वर्ष 2023 में यह बढ़कर 39,50,10,02,169 रुपये हो गया।
वर्ष 2024 में वाहन पंजीकरण से 43,87,36,56,590 रुपये और वर्ष 2025 में 45,89,52,27,726 रुपये का राजस्व दर्ज किया गया। वर्ष 2026 में अब तक यह आंकड़ा 39,34,40,40,822 रुपये रहा है।
ये आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में वाहन बाजार का विस्तार सरकारी राजस्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात प्रबंधन, पार्किंग और सड़कों पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना भी जरूरी होगा।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

