महेंद्रगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो रही पढ़ाई को अतिरिक्त सहारा देने के लिए राज्य सरकार ने ‘स्वयंसेवक शिक्षक पंजीकरण पोर्टल’ शुरू किया है। इस व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त शिक्षक, पूर्व सैनिक और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के इच्छुक अन्य लोग भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने में अपना सहयोग दे सकेंगे। हालांकि, केवल पोर्टल पर पंजीकरण करा लेना ही स्कूल में पढ़ाने की अनुमति नहीं होगा, बल्कि आवेदकों को सख्त सत्यापन और चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
सीएम नायब सैनी ने लॉन्च किया पोर्टल
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 13 अक्टूबर को चंडीगढ़ में इस पोर्टल की औपचारिक शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के अनुभवी लोगों की सहभागिता से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारना है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित उन स्कूलों में स्वयंसेवकों की मदद बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में शिक्षकों की कमी बनी रहती है।
दो श्रेणियों में कर सकेंगे आवेदन
स्वयंसेवक शिक्षक बनने के इच्छुक आवेदकों के लिए शिक्षा विभाग के एमआईएस पोर्टल hryedumis.gov.in पर पंजीकरण की सुविधा दी गई है। इसके लिए दो श्रेणियां तय की गई हैं:
- पहली श्रेणी: हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए।
- दूसरी श्रेणी: पूर्व सैनिक, बड़ी कक्षाओं के छात्र और समाजसेवा से जुड़े अन्य इच्छुक व्यक्ति।
सेवानिवृत्त शिक्षक अपने लंबे शैक्षणिक अनुभव से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे, जबकि पूर्व सैनिक अनुशासन, नियमितता और सामान्य मार्गदर्शन से बच्चों को सहयोग दे सकेंगे।
बिना मानदेय देनी होंगी सेवाएं
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि स्वयंसेवक शिक्षकों को कोई मानदेय या वेतन नहीं दिया जाएगा। उन्हें पूरी तरह स्वेच्छा से निशुल्क सेवाएं देनी होंगी। यह व्यवस्था नियमित शिक्षकों की स्थायी भर्ती के बजाय समाज की भागीदारी से विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक मदद देने के लिए तैयार की गई है।
एडीसी की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी चयन
आवेदकों का चयन और सत्यापन जिला स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी। आवेदकों के पृष्ठभूमि सत्यापन के लिए डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी की भूमिका भी तय की गई है। जांच और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चयनित स्वयंसेवक को स्कूल आवंटित किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति सीधे किसी स्कूल में जाकर पढ़ाना शुरू नहीं कर सकेगा।
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