Yamunanagar Farmers : यमुनानगर। खेतों में पानी भरा हो तो किसान चाहकर भी फसल नहीं उगा सकता। जमीन होने के बावजूद खेती बंद हो जाए तो परिवार की आमदनी पर भी असर पड़ता है। यमुनानगर जिले के छछरौली तहसील स्थित कोटड़ा कानह सिंह गांव के करीब 150 किसान लंबे समय से इसी परेशानी का सामना कर रहे थे। जलभराव के कारण उनकी लगभग 100 एकड़ जमीन पर खेती करना मुश्किल हो गया था। अब किसानों को इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

किसानों की गुहार पर एक हफ्ते में पहुंची मदद

ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों से पानी निकालने की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कई जगह गुहार लगाई थी। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस बारे में अवगत कराया गया। हालांकि, किसानों का कहना है कि लंबे समय तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

इसके बाद गांव के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल संत रामपाल जी महाराज के आश्रम पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जलभराव के कारण खेती से वंचित हो रहे किसानों की परेशानी बताई और मदद की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, आश्रम तक अपनी बात पहुंचाने के करीब एक सप्ताह के भीतर ही गांव में सहायता पहुंच गई।

2250 मीटर पाइप और मोटर से निकलेगा खेतों का पानी

किसानों की मदद के लिए आश्रम की ओर से 2250 मीटर पाइप और एक मोटर उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से खेतों में जमा पानी बाहर निकाला जा सकेगा। इससे लंबे समय से खाली पड़ी जमीन को दोबारा खेती के योग्य बनाने में मदद मिलेगी।

ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश या अन्य कारणों से खेतों में पानी भरने पर अब मोटर और पाइप की सहायता से पानी बाहर निकालने का रास्ता मिलेगा। इससे किसानों को अपनी जमीन पर फसल उगाने का मौका मिल सकेगा।

जमीन होते हुए भी खेती नहीं कर पा रहे थे किसान

कोटड़ा कानह सिंह गांव के किसानों के लिए जलभराव लंबे समय से बड़ी परेशानी बना हुआ था। करीब 100 एकड़ जमीन पर पानी जमा रहने के कारण किसान उसका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। खेती प्रभावित होने से उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना भी करना पड़ रहा था।

ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि जलनिकासी की व्यवस्था उनकी इस परेशानी को दूर करने में मददगार साबित होगी। यदि खेतों से पानी निकालने का इंतजाम प्रभावी रहता है, तो इन जमीनों पर दोबारा फसलें उगाई जा सकेंगी।

ग्रामीणों ने जताया आभार

मदद मिलने के बाद गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के आश्रम का आभार जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या रखी और करीब एक सप्ताह के भीतर सहायता गांव तक पहुंच गई। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि जलनिकासी की व्यवस्था से खेतों को कितनी जल्दी खेती के योग्य बनाया जा सकेगा।

करीब 150 किसानों से जुड़ी इस समस्या के समाधान की दिशा में मिली मदद ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगाई है। किसानों को भरोसा है कि खेतों से जलभराव दूर होने पर उनकी जमीन फिर से फसल उत्पादन में काम आ सकेगी।

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