जयपुर | राजस्थान की प्रसिद्ध सांभर झील के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. झील क्षेत्र में बिना मंजूरी के सोलर प्लांट के लिए एमओयू (MoU) करने और इसकी जानकारी अदालत से छिपाने को हाईकोर्ट ने ‘अदालती अवमानना’ माना है. एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में हिंदुस्तान सॉल्ट्स के एमडी और एसजेवीएन (SJVN) ग्रीन एनर्जी के सीईओ अजय कुमार सिंह सहित नए सीईओ के खिलाफ स्वप्रेरणा से अवमानना का प्रसंज्ञान लिया है.

11 फरवरी को कोर्ट में होना होगा पेश
अदालत ने इन अधिकारियों को बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं. सभी संबंधित अफसरों को 11 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा. उन्हें अदालत को यह स्पष्ट करना होगा कि अदालती आदेशों की अवहेलना करने के लिए क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के तहत दंडित किया जाए.
क्या है पूरा विवाद?
मामले में न्यायमित्र (Amicus Curiae) वरिष्ठ अधिवक्ता आरबी माथुर ने कोर्ट को बताया कि सांभर झील की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए अदालत ने वहां सोलर प्लांट लगाने पर पहले ही अंतरिम रोक लगा रखी है. इसके बावजूद:
- गोपनीय एमओयू: हिंदुस्तान सॉल्ट्स लिमिटेड ने भारत सरकार की सहायक कंपनी एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी के साथ गुपचुप तरीके से एमओयू कर लिया, ताकि चरणबद्ध तरीके से वहां सोलर प्लांट लगाया जा सके.
- अवैध निर्माण की कोशिश: याचिकाकर्ता दिनेश कुमावत ने पीआईएल के जरिए कोर्ट को बताया कि मौके पर जेसीबी, ट्रक और निर्माण सामग्री पहुंच चुकी है और वहां पक्के निर्माण की कोशिशें जारी हैं.
कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर बरसे जज
खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब 17 दिसंबर को ही स्थानीय पुलिस और एसपी को निर्माण सामग्री हटाकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे, तो उसके बाद एमओयू करना सीधे तौर पर अदालत को चुनौती देना है.
सांभर झील का महत्व: सांभर झील न केवल भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, बल्कि यह रामसर साइट भी है. यहां सोलर प्लांट जैसा भारी निर्माण इसकी जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों (विशेषकर फ्लेमिंगो) के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है.
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