रांची। बड़गाईं जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में ईडी से जवाब मांगा है और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया है। वहीं, निचली अदालत में चल रही आरोप गठन की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी।
आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ हाईकोर्ट में याचिका लंबित होने के आधार पर ईडी की विशेष अदालत से आरोप गठन की सुनवाई टालने का आग्रह नहीं किया जाए। ऐसे में बड़गाईं जमीन मामले में निचली अदालत की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
हेमंत सोरेन की ओर से ईडी कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप गठन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।
क्या है हेमंत सोरेन की दलील?
याचिका में हेमंत सोरेन की ओर से पीएमएलए एक्ट की धारा 44(1)(डी) का हवाला देते हुए आरोप गठन की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। उनका पक्ष है कि मामले में जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए जांच पूरी होने तक आरोप गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।वहीं, ईडी की ओर से इस मांग का विरोध किया जा रहा है।
8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
पूरा मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच का है। ईडी की जांच में जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और अवैध तरीके से जमीन हासिल किए जाने से जुड़े आरोप सामने आए हैं।
मंगलवार को टल गई थी सुनवाई
इससे पहले मंगलवार को समयाभाव के कारण हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी। कोर्ट ने बुधवार को दोपहर बाद सुनवाई तय की थी। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ऑनलाइन पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने भी पक्ष रखा।
इससे पहले विशेष PMLA अदालत ने 30 सितंबर को आरोप गठन की सुनवाई निर्धारित की थी। अदालत ने हेमंत सोरेन को मामले से जुड़े दस्तावेजों के अवलोकन के लिए समय दिया था।


