कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से भोपाल के वकील राकेश रावल के साथ हुई मारपीट और विवाद के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है और साथ ही जांच पूरी होने तक एफआईआर (FIR) पर किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से मना किया है। इस आदेश से पीड़ित वकील को बड़ी राहत मिली है।
यह है पूरा मामला
यह पूरा विवाद भोपाल में रूट डाइवर्ट होने के दौरान सामने आया था। आरोप है कि भोपाल की जहांगीराबाद पुलिस ने ट्रैफिक व्यवस्था के दौरान वकील राकेश रावल के साथ मारपीट की। पीड़ित अधिवक्ता राकेश रावल का आरोप है कि पुलिसकर्मी उन्हें थाने ले जाने के बहाने एक सुनसान इलाके में ले गए और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इस घटना के विरोध में भोपाल में वकीलों ने जोरदार हंगामा किया था, जिसके बाद कुछ दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिरी थी (निलंबन या लाइन अटैच जैसी कार्रवाई हुई थी)। दूसरी ओर, पुलिस का दावा है कि वकील राकेश रावल ने ट्रैफिक एसीपी अजय वाजपेयी और ड्यूटी पर तैनात अन्य कर्मियों के साथ सरेआम गाली-गलौज और अभद्रता की थी, जिसके आधार पर पुलिस ने भी कार्रवाई की बात कही थी।
हाईकोर्ट के निर्देश और आगामी कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील राकेश सिंह भदौरिया ने हाईकोर्ट का रुख किया। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए निम्नलिखित अहम निर्देश दिए हैं।मामले की निष्पक्ष जांच होने तक दर्ज एफआईआर पर किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई करने से रोक लगा दी गई है।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
अदालत ने पुलिस को आदेश दिया है कि घटना से जुड़े संबंधित क्षेत्र के सभी सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footages) को तुरंत सुरक्षित (Save) किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले वकीलों को राहत मिली है, वहीं अब मामले की निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
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