दिल्ली में पिछले कई दिनों से चल रही DTC बस कर्मियों की हड़ताल का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली सरकार और दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) से सवाल किया कि हड़ताल पर चल रहे ड्राइवरों के खिलाफ एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ESMA) के प्रावधान क्यों लागू नहीं किए गए हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार और DTC से हड़ताल को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने यह सवाल ऐसे समय उठाया है जब DTC कर्मियों की हड़ताल के कारण दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और DTC से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल के मामले में ESMA के तहत कार्रवाई नहीं करने का आधार क्या है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार और DTC से पूछा कि हड़ताल कर रहे ड्राइवरों के खिलाफ एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ESMA) के प्रावधान क्यों लागू नहीं किए गए हैं। PIL में हड़ताल और विरोध-प्रदर्शन के कारण आम लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर चिंता जताई गई थी। याचिका में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से यात्रियों को होने वाली दिक्कतों का मुद्दा उठाया गया है।

DTC ने कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान DTC की ओर से अधिवक्ता अवनीश अहलावत अदालत के समक्ष पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि DTC ड्राइवरों की कोई यूनियन नहीं है। उनके मुताबिक, हड़ताल में शामिल लोग WhatsApp संदेशों के जरिए हड़ताल के लिए लामबंद हो रहे हैं। DTC की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि हड़ताल में शामिल कुछ लोगों द्वारा बसों में तोड़फोड़ की जा रही है। इन दावों के बाद अदालत ने हड़ताल की स्थिति और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर सरकार और DTC से जवाब मांगा है।

DTC के वकील अवनीश अहलावत ने अदालत को बताया कि करीब 96 प्रतिशत बसें अब दोबारा सेवा में आ गई हैं। सुनवाई के दौरान DTC ने यह भी बताया कि उसने हड़ताल की स्थिति से निपटने के लिए एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ESMA) लागू करने के संबंध में दिल्ली सरकार को एक फाइल भेजी थी। इस पर अदालत ने दिल्ली सरकार से ESMA लागू करने के प्रस्ताव पर कानून के मुताबिक निर्णय लेने को कहा।

‘कानून के मुताबिक फैसला ले सरकार’

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने PIL का निपटारा करते हुए दिल्ली सरकार से कहा कि वह ESMA लागू करने के मुद्दे की समीक्षा करे और कानून के अनुसार फैसला ले। कोर्ट ने अपने आदेश में उम्मीद जताई कि सरकार मामले की समीक्षा करेगी और कानून के

हालात नहीं सुधरे तो दोबारा आ सकते हैं याचिकाकर्ता

दिल्ली में DTC बस कर्मचारियों की हड़ताल के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि हालात में सुधार नहीं होता है तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का रुख कर सकता है। अदालत ने दिल्ली सरकार को DTC बस सेवा सुचारु बनाए रखने के लिए कानून के मुताबिक आवश्यक कदम उठाने को कहा है। दरअसल, दिल्ली में DTC बसों के ड्राइवर, कंडक्टर और सार्वजनिक बसों के संचालन से जुड़े अन्य कर्मचारी 15 सितंबर से हड़ताल पर हैं। कर्मचारी वेतन और अन्य लाभों में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) में दिल्ली में सार्वजनिक बस परिवहन सेवा को तत्काल बहाल करने और उसके उचित रखरखाव व संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग की गई थी।

हड़ताल से लाखों यात्रियों के प्रभावित होने का दावा

याचिकाकर्ता अमी सिसोदिया ने अदालत के समक्ष कहा कि सार्वजनिक बस सेवा प्रभावित होने से आम यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए मुफ्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें आने-जाने के लिए महंगे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। याचिका में दावा किया गया कि हड़ताल का असर स्टूडेंट्स, दिहाड़ी मजदूरों, नौकरीपेशा कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, मरीजों और आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों पर पड़ रहा है, जो किफायती सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि DTC बसों की सेवाएं प्रभावित होने के कारण यात्रियों का अतिरिक्त दबाव दिल्ली मेट्रो पर आ गया है।

DTC ने बताया- 96 फीसदी बसें सेवा में लौटीं

सुनवाई के दौरान DTC की ओर से अदालत को बताया गया कि स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाए गए हैं और करीब 96 फीसदी बसें फिर से सेवा में आ गई हैं। DTC ने हड़ताल की स्थिति से निपटने के लिए ESMA लागू करने के संबंध में दिल्ली सरकार को फाइल भेजे जाने की जानकारी भी दी। इसके बाद हाईकोर्ट ने PIL का निपटारा करते हुए दिल्ली सरकार से ESMA लागू करने के प्रस्ताव पर कानून के मुताबिक फैसला लेने को कहा।

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