हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था और हूटर-सायरन लगी गाड़ियों के साथ गलत या बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने मामले में कमेटी गठित करते हुए प्रमुख सचिव को 30 नवंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के लिए तलब किया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, शहर की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़े इस मामले में लगभग आधा दर्जन याचिकाएं न्यायालय के समक्ष लंबित हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता पंडित करण बैरागी ने पिछली सुनवाई में दिए गए आदेशों की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

ट्रैफिक जाम और पुलिस बल की कमी पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि अदालत ने पहले प्रशासन से पूछा था कि ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने और पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद शहर में यातायात की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। 13 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान भी अधिवक्ता मनीष यादव ने ट्रैफिक व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा था कि शहर में अब भी कई जगह यातायात के हालात खराब हैं और पुलिस की कार्रवाई मुख्य रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के चालान तक सीमित दिखाई देती है। याचिकाकर्ता पक्ष ने पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए की गई भर्तियों और प्रशासनिक प्रयासों पर भी सवाल उठाए।

ये भी पढ़ें: इंदौर में शोर मचाने वालों पर हाईकोर्ट सख्त, हर थाने में पहुंचेगा साउंड मीटर; कचरा गाड़ियों के लाउडस्पीकर की आवाज भी होगी कम

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की पीठ ने सरकार से पुलिस बल की भर्ती को लेकर जानकारी मांगी थी। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा था कि पिछले वर्षों में कितनी भर्तियां की गईं और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। मामले में विस्तृत आदेश पारित करने के लिए फैसला सुरक्षित रखा गया था। अब जारी आदेश में अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। साथ ही प्रमुख सचिव को 30 नवंबर 2026 को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

हूटर-सायरन और नंबर प्लेट वाले वाहनों पर भी कार्रवाई का सवाल

इस मामले में हूटर-सायरन लगी गाड़ियों और गलत या बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाओं में शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित करने वाले ऐसे वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय सामने आया है। अब 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई में प्रमुख सचिव की उपस्थिति और प्रशासन की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी। अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि ट्रैफिक जाम, पुलिस बल की कमी और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m