वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में डीईओ और बीईओ के प्रभारी पद को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर कोई अधिकारी ऊंचे पद का प्रभार पाने का अधिकार नहीं मांग सकता।
दरअसल, गरियाबंद में जूनियर अधिकारी राजेश चंद्राकर को प्रभारी DEO बनाए जाने के खिलाफ BEO किशुन लाल मातवाले ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उनका दावा था कि वे 1995 से विभाग में सेवा दे रहे हैं और सीनियर होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रभारी नियुक्ति एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। अधिकारी की कार्यशैली और पद के लिए उसकी उपयुक्तता को देखते हुए सरकार फैसला ले सकती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे प्रशासनिक फैसलों में जब तक किसी नियम का उल्लंघन न हो, हाईकोर्ट सामान्य तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद बिलासपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में जूनियर अधिकारियों को प्रभारी DEO-BEO बनाने का रास्ता साफ होने की संभावना है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


