कर्नाटक सरकार के स्कूलों में जनेऊ व हिजाब समेत धार्मिक प्रतीकों को अनुमति देने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने और शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया है। बता दें कि, मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने गुरुवार को साफ किया कि शैक्षणिक संस्थानों में भगवा शाल पहनने की अनुमति नहीं होगी, जबकि पहले से प्रचलित धार्मिक प्रतीक जैसे हिजाब, पगड़ी, रुद्राक्ष, शिवधारा और जनेऊ की अनुमति जारी रहेगी। मैसूर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्दरमैया ने कहा कि केवल वही धार्मिक परंपराएं मान्य होंगी जो पहले से प्रचलन में हैं। कोई नई परंपरा लागू नहीं की जा सकती।

तेंगिंकाई बोले- गंभीर गलती

भाजपा विधायक महेश तेंगिंकाई ने कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला गंभीर गलती है और इसकी कोई मांग नहीं थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार स्कूलों और कॉलेजों में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदायों के बीच अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है।

तेंगिंकाई ने कहा कि 2022 में जब भाजपा सरकार सत्ता में थी, तब अदालतों ने भी ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने के पक्ष को सही ठहराया था। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों के बीच धार्मिक पहचान के आधार पर भेद पैदा कर सरकार आखिर क्या हासिल करना चाहती है। उनके मुताबिक, स्कूल और कॉलेज शिक्षा के केंद्र होने चाहिए, न कि धार्मिक पहचान दिखाने की जगह। इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश भाजपा प्रवक्ता शेख बाजी ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह फैसला वोट बैंक राजनीति से प्रेरित है और इससे बच्चों को धर्म के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा।

नारायणस्वामी ने भी की आलोचना

वहीं कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म का उद्देश्य समानता और एकरूपता बनाए रखना होता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी धर्म के आधार पर पहचान नहीं दिखनी चाहिए।

नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग नियम बना रही है, जिससे भविष्य में टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले समाज में और ज्यादा संवेदनशीलता और विभाजन को जन्म दे सकते हैं।

पिछली सरकार का फैसला पलटा

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने बुधवार को 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय हिजाब बनाम भगवा शाल विवाद ने पूरे राज्य में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया था। वहीं जमात-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि इससे मुस्लिम छात्राओं को बिना डर और भेदभाव के शिक्षा जारी रखने में मदद मिलेगी।

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