Hisar Kidnapping Case : हिसार। करीब नौ साल पुराने अपहरण और बैंक मैनेजर को कथित तौर पर झूठे अफीम तस्करी के मामले में फंसाने से जुड़े केस में शनिवार को नया घटनाक्रम सामने आया। मामले में गैर-जमानती वारंट का सामना कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर समेत चार आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने चारों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
सरेंडर करने वालों में इंस्पेक्टर कप्तान सिंह, सब-इंस्पेक्टर भूप सिंह के अलावा आशीष और वीर सेन शामिल हैं। न्यायिक दंडाधिकारी आयुष की अदालत में हुई सुनवाई के बाद आरोपियों को जमानत मिल गई। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता पवन रापड़िया ने इसकी पुष्टि की है। मामले में अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।
यह मामला सुनाम निवासी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक रमनजीत सिंह की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजीव कुमार सिंधु के मुताबिक, वर्ष 2017 में कार टक्कर को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में अपहरण, मारपीट और अफीम बरामदगी के केस तक पहुंच गया।
कार की टक्कर के बाद बढ़ा विवाद
बताया गया है कि 16 दिसंबर 2017 को हिसार की रेड स्क्वेयर मार्केट में रमनजीत सिंह की कार की टक्कर तत्कालीन सीआईए एएसआई विरेंद्र सिंह के बेटे आशीष उर्फ आशु की कार से हो गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने माफी मांगने के साथ कार की मरम्मत का खर्च उठाने की बात कही थी। इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ और उन्हें फोन पर धमकियां मिलने का आरोप लगाया गया।
इसके दो दिन बाद 18 दिसंबर को रमनजीत सिंह कार खरीदने के लिए 3.35 लाख रुपये लेकर जा रहे थे। आरोप है कि जीत धर्मकांटा के पास उनकी कार रोक दी गई। इसके बाद वाहन में तोड़फोड़ और उनके साथ मारपीट की गई तथा उन्हें जबरन दूसरी गाड़ी में बैठाकर सीआईए थाने ले जाने का आरोप लगाया गया।
थाने में मारपीट और रकम छीनने का आरोप
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि सीआईए थाने में उनके साथ मारपीट की गई और कपड़े उतरवाकर प्रताड़ित किया गया। उन्होंने 90 हजार रुपये छीनने का आरोप भी लगाया। रमनजीत सिंह के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन इंस्पेक्टर कप्तान सिंह से मदद और रिहाई की गुहार लगाई थी।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया कि कंट्रोल रूम में शिकायत करने के कारण उन्हें सबक सिखाने की बात कही गई और बाद में उनकी कार से अफीम बरामद होने का मामला दर्ज कर दिया गया। यही मामला आगे चलकर पूरे विवाद का अहम हिस्सा बना।
अफीम केस में बरी होने के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई
रमनजीत सिंह को अफीम मामले में 8 जनवरी 2018 को जमानत मिल गई थी। इसके बाद मामला अदालत में चलता रहा और वर्ष 2022 में उन्हें अफीम से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया गया। बरी होने के बाद उन्होंने कथित तौर पर उन्हें फंसाने वाले पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ अदालत का रुख किया तथा इस्तगासा दायर किया।
इस मामले में इससे पहले 25 सितंबर को भी छह पुलिसकर्मियों समेत सात आरोपियों ने अदालत में सरेंडर किया था और उन्हें जमानत मिल गई थी। अब इंस्पेक्टर समेत चार और आरोपियों के अदालत पहुंचने के बाद इस पुराने मामले में कुल आरोपियों के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित है।
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