Dharm Desk : भाइयों के एक छल से उजड़ गया था वीरावती का सुहाग, फिर कैसे वापस मिला पति का जीवन? करवा चौथ की इस प्रचलित कथा में छिपा है व्रत, श्रद्धा और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व। सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का पर्व पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से जुड़ा है।

इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को विधि-विधान से भगवान गणेश, शिव-पार्वती, करवा माता तथा चंद्रमा की पूजा करती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि करवा चौथ के व्रत की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे वीरावती की कौन-सी कथा प्रचलित है?

करवा चौथ व्रत की शुरुआत कैसे हुई

करवा चौथ के आरंभ को लेकर अलग-अलग धार्मिक कथाएं प्रचलित है। इनमें वीरावती की कथा सबसे प्रसिद्ध है। इस कथा में बताया गया है कि चंद्रमा को देखे बिना व्रत खोलने के कारण वीरावती को कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ा था। बाद में उसकी श्रद्धा और पूजा से प्रसन्न होकर देवी ने उसका सुहाग वापस दिलाया। इसी कथा के चलते करवा चौथ पर चंद्र दर्शन और विधिपूर्वक व्रत खोलने को विशेष महत्व दिया जाता है।

वीरावती की पूरी कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। जिसका नाम वीरावती था। विवाह के बाद वीरावती ने अपने मायके में पहला करवा चौथ का व्रत रखा। दिनभर निर्जला उपवास करने के कारण शाम होते-होते वह भूख-प्यास से व्याकुल हो गई।

अपनी बहन की हालत देखकर उसके सातों भाइयों को दुख हुआ। उन्होंने बहन का व्रत खुलवाने के लिए एक उपाय सोचा। भाइयों ने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की ओट से ऐसा प्रकाश दिखाया, जो चंद्रमा जैसा दिखाई दे रहा था।
वीरावती ने उस प्रकाश को चंद्रमा समझ लिया। अर्घ्य देने के बाद भोजन करने बैठ गई। कथा के अनुसार, पहला कौर खाते ही उसे छींक आई, दूसरे कौर में बाल निकला और तीसरा कौर खाने से पहले ही उसे पति की मृत्यु का समाचार मिला।
यह सुनकर वीरावती दुखी हो गई।

उसे समझ आया कि उसने वास्तविक चंद्रदर्शन किए बिना ही व्रत खोल लिया था। इसके बाद उसने अपने पति के जीवन की कामना करते हुए कठोर तप और पूजा की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उसके पति को जीवनदान दिया। इस तरह वीरावती का सुहाग फिर से लौट आया।

करवा चौथ पर चंद्र दर्शन क्यों हैं जरूरी

करवा चौथ की कथा में चंद्रमा को अर्घ्य देने और व्रत को विधिपूर्वक पूरा करने का महत्व बताया गया है। इस दिन महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अर्घ्य देती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं। कथा का संदेश है कि व्रत में श्रद्धा के साथ नियम और विधि का भी ध्यान रखना चाहिए।

आपके शहर में कब होंगे चंद्रमा के दर्शन

करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रमा निकलने का समय देखना चाहिए। यदि चंद्र दर्शन को लेकर एक एवरेज समय निकाला जाए तो वह रात 8:18 के बाद का ही रहने वाला है। लेकिन सटीक जानकारी के लिए अपने शहर का सही समय देखें।