Automobile Desk: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में जब किसी पुरानी कार का ओडोमीटर 1 लाख या 2 लाख किलोमीटर के आंकड़े को पार कर लेता है, तो ज्यादातर गाड़ी मालिकों के मन में उसे बदलने का विचार आने लगता है। आम धारणा यह बन चुकी है कि इतनी दूरी तय करने के बाद वाहन का इंजन कमजोर हो जाता है और उस पर भारी-भरकम मेंटेनेंस खर्च आना तय है। हालांकि, गाड़ियों की आधुनिक टेक्नोलॉजी और बेहतर गुणवत्ता को देखते हुए यह मान लेना पूरी तरह सही नहीं है कि ज्यादा चली हुई हर कार कबाड़ में तब्दील हो चुकी है।

कार की वास्तविक उम्र इस बात से तय नहीं होती कि उसने सड़क पर कितने किलोमीटर का सफर तय किया है, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि उसका रखरखाव किस तरह किया गया है। अगर किसी गाड़ी की नियमित सर्विसिंग समय पर हुई है, इंजन ऑयल नियमित अंतराल पर बदला गया है और सस्पेंशन व ब्रेक जैसे हिस्सों का ध्यान रखा गया है, तो वह 2 लाख किलोमीटर चलने के बाद भी बिल्कुल स्मूथ परफॉर्म कर सकती है। इसके विपरीत, सही देखभाल के बिना महज 50 हजार किलोमीटर चली कार में भी गंभीर तकनीकी खराबी पैदा हो सकती है।

ऐसे में केवल ओडोमीटर की रीडिंग देखकर कार बेचने का जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उसकी मौजूदा मैकेनिकल कंडीशन का बारीकी से आकलन करना चाहिए। अगर कार चलाने में किसी तरह की झिझक नहीं महसूस हो रही है और इंजन बिना किसी असामान्य आवाज के चल रहा है, तो उसे कुछ और साल इस्तेमाल करना घाटे का सौदा नहीं है।

हालांकि, कुछ स्पष्ट संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि वाहन को बार-बार गैरेज ले जाना पड़ रहा हो और हर महीने मरम्मत पर मोटा पैसा खर्च हो रहा हो, तो सतर्क हो जाना चाहिए। इंजन से धुआं निकलना, साइलेंसर से ऑयल की बदबू आना, गियर शिफ्टिंग में अड़चन या बार-बार इंजन ऑयल का लेवल कम होना जैसी समस्याएं यह दर्शाती हैं कि अब मुख्य मैकेनिकल पार्ट्स घिस चुके हैं।

फैसला करते समय एक व्यावहारिक गणित अपनाना फायदेमंद रहता है। अपनी कार की मौजूदा रीसेल वैल्यू और उसमें आने वाले संभावित मरम्मत खर्च का तुलनात्मक अध्ययन करें। यदि गाड़ी की ओवरहालिंग या मेजर रिपेयरिंग का खर्च उसकी मौजूदा बाजार कीमत के एक बड़े हिस्से के बराबर पहुंच रहा है, तो पुरानी कार में और पैसे लगाने के बजाय उसे एक्सचेंज या सेल करके नई गाड़ी में इन्वेस्ट करना समझदारी भरा कदम माना जा सकता है।

अंततः, किसी भरोसेमंद और अनुभवी मैकेनिक से गाड़ी के इंजन कम्प्रेसर, गियरबॉक्स, सस्पेंशन और चेसिस की पूरी जांच कराएं। अगर मैकेनिक की रिपोर्ट पॉजिटिव रहती है और मेंटेनेंस का खर्च आपके बजट में है, तो आप बिना किसी झिझक के अपनी पुरानी कार के साथ सफर जारी रख सकते हैं।