Automobile Desk: भारतीय बाजार में इन दिनों मिड-साइज़ SUV और सेडान खरीदने निकले लोग एक अजीब उलझन से गुजर रहे हैं। शोरूम में एक तरफ पूरी तरह बिजली से चलने वाली इलेक्ट्रिक कारें (EVs) खड़ी हैं, तो दूसरी तरफ हाइब्रिड मॉडल। ताज्जुब की बात यह है कि कई बार हाइब्रिड गाड़ी का अंतिम बिल यानी ऑन-रोड कीमत EV से भी ज्यादा बैठ रहा है।

अक्सर खरीदार सोचते हैं कि जब हाइब्रिड में ईवी जैसी बड़ी बैटरी ही नहीं है, फिर कंपनियां इसके इतने पैसे क्यों वसूल रही हैं? असल में इसकी सबसे बड़ी वजह हाइब्रिड का दोहरा सिस्टम है। हाइब्रिड कार खरीदते वक्त आप सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि दो अलग-अलग तकनीकों का खर्च दे रहे होते हैं। इसमें एक पूरा पेट्रोल इंजन भी लगा होता है और साथ में इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और दोनों को एक साथ संभालने वाला कंट्रोलर सिस्टम भी।

इसके उलट इलेक्ट्रिक कार में पेट्रोल इंजन का कोई काम नहीं होता। वहां पूरी लागत बड़ी बैटरी और मोटर पर ही जाती है। जैसे मारुति e Vitara में 49kWh और 61kWh जैसे बड़े बैटरी पैक मिलते हैं। वहीं हाइब्रिड में बैटरी भले छोटी हो, लेकिन पेट्रोल और बिजली का तालमेल बनाने में मैन्युफैक्चरिंग लागत काफी बढ़ जाती है।

कीमत का यह फर्क शोरूम से निकलकर सड़क पर आते ही और चौड़ा हो जाता है। एक्स-शोरूम दाम भले ही मारुति e Vitara और Grand Vitara या Victoris जैसे हाइब्रिड मॉडल्स का आसपास दिखे, लेकिन ऑन-रोड आते-आते खेल बदल जाता है। ज्यादातर राज्यों में ईवी पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में भारी छूट मिलती है। वहीं हाइब्रिड गाड़ियों को आम पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तरह ही टैक्स ब्रैकेट में रखा जाता है। यही वजह है कि हाइब्रिड गाड़ियां ऑन-रोड आते-आते करीब 1.30 लाख से 1.80 लाख रुपये तक महंगी हो जाती हैं।

यही हाल सेडान और बड़ी SUVs में भी देखने को मिल रहा है। होंडा सिटी हाइब्रिड का ऑन-रोड बजट जिस आंकड़े को छूता है, उतने में हुंडई क्रेटा ईवी या टाटा सेरा ईवी का बड़ा बैटरी वाला वेरिएंट आसानी से आ जाता है।

आने वाले दिनों में रेनॉ डस्टर और किआ सेल्टॉस जैसी गाड़ियां भी हाइब्रिड अवतार में उतरने की तैयारी कर रही हैं, जिससे यह बाजार और दिलचस्प होगा। अब सवाल यह है कि कौन-सा विकल्प चुनें? अगर आपका रोजाना का सफर ज्यादा है और आप चार्जिंग की झंझट या रेंज की चिंता के बिना सिर्फ पेट्रोल भरवाकर लंबी दूरी तय करना चाहते हैं, तो हाइब्रिड आपके लिए बनी है। वहीं जिनके पास घर या ऑफिस में गाड़ी खड़ी करके चार्ज करने का तय सेटअप है, उनके लिए शुद्ध ईवी ही ज्यादा समझदारी भरा सौदा साबित हो रही है।