Business Desk – Hybrid Funds vs Bank FD : देश के हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) अब पारंपरिक बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और पुराने डेट म्यूचुअल फंड्स से दूरी बना रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बदलते टैक्स नियम और बेहतर पोस्ट-टैक्स रिटर्न की तलाश है. अब अमीर निवेशकों का रुझान हाइब्रिड डेट फंड्स और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) की ओर तेजी से बढ़ रहा है. इन निवेश विकल्पों में बेहतर रिटर्न के साथ टैक्स बचत का भी फायदा मिल रहा है.

क्यों बढ़ रहा है हाइब्रिड फंड्स और SIF का क्रेज?

डेट म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स नियमों में बदलाव के बाद HNIs के लिए पारंपरिक निवेश विकल्प पहले जितने आकर्षक नहीं रहे. इसी वजह से अब वे UNIFI और Redhex जैसे हाइब्रिड फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं.

ये फंड्स निवेशकों का पैसा केवल एक एसेट क्लास में नहीं लगाते, बल्कि फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स, शेयर बाजार और REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) जैसे कई विकल्पों में निवेश करते हैं. इससे निवेश का जोखिम कम होता है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

टैक्स बचाने का नया फॉर्मूला बना बड़ी वजह

इन फंड्स की सबसे बड़ी खासियत उनका टैक्स स्ट्रक्चर माना जा रहा है. बैंक FD में मिलने वाले ब्याज पर निवेशक को उसकी आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है. यदि कोई व्यक्ति उच्च टैक्स स्लैब में आता है, तो उसे 30 फीसदी या उससे अधिक टैक्स चुकाना पड़ सकता है.

इसके विपरीत, हाइब्रिड फंड्स और SIF में तय अवधि तक निवेश बनाए रखने पर मुनाफे पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के नियम लागू हो सकते हैं, जिससे कई मामलों में टैक्स का बोझ कम पड़ता है. इसी कारण टैक्स चुकाने के बाद निवेशकों के हाथ में अधिक रिटर्न बचता है.

बैंक FD और हाइब्रिड फंड्स में कितना अंतर?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई HNI बैंक FD में निवेश करता है, तो टैक्स कटने के बाद उसका प्रभावी रिटर्न कई मामलों में करीब 4.5 फीसदी तक सिमट सकता है. वहीं, यदि वही निवेश हाइब्रिड फंड्स या SIF जैसे विकल्पों में किया जाए, तो टैक्स के बाद करीब 7 फीसदी तक प्रभावी रिटर्न मिलने की संभावना बताई जा रही है. यानी निवेशक को 2 से 2.5 फीसदी तक अतिरिक्त पोस्ट-टैक्स रिटर्न मिल सकता है. लंबी अवधि में यही अतिरिक्त रिटर्न करोड़ों रुपए की अतिरिक्त संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है.

कम जोखिम के साथ विविध निवेश का फायदा

हाइब्रिड फंड्स की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इनमें निवेश कई अलग-अलग एसेट क्लास में किया जाता है. जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आता है, तब डेट इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य निवेश विकल्प पोर्टफोलियो को संतुलित रखने में मदद करते हैं. इससे जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है और रिटर्न अधिक स्थिर हो सकता है.

किन निवेशकों के लिए हैं ये विकल्प?

हाइब्रिड फंड्स और SIF मुख्य रूप से उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं, जिनके पास बड़ी निवेश राशि होती है और जो टैक्स दक्ष (Tax Efficient) तरीके से संपत्ति बढ़ाना चाहते हैं. हालांकि हर निवेशक की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य अलग होते हैं. इसलिए केवल अधिक रिटर्न के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना बेहतर होता है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

बदलते टैक्स नियमों और निवेश के नए विकल्पों ने HNIs की रणनीति बदल दी है. अब उनका फोकस केवल सुरक्षित रिटर्न पर नहीं, बल्कि पोस्ट-टैक्स रिटर्न, पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन और लंबी अवधि में बेहतर संपत्ति निर्माण पर है. यही वजह है कि बैंक FD के मुकाबले हाइब्रिड फंड्स और SIF जैसे निवेश विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.

ध्यान दें: किसी भी फंड पर लागू टैक्स उसके वास्तविक ढांचे और मौजूदा आयकर नियमों पर निर्भर करता है. निवेश से पहले टैक्स सलाहकार या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित है.