IAS Shikhar Agrawal APO: राजस्थान सरकार ने 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी और अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को APO (Awaiting Posting Order) कर दिया है। कार्मिक विभाग ने देर रात इस संबंध में आदेश जारी किया, जिसमें कार्रवाई का कारण प्रशासनिक बताया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अग्रवाल और उनके परिवार के नाम पर अलवर व उदयपुर में खरीदे गए 40 विला-कॉटेज और उन्हें लीज पर देने का मामला चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये है, जबकि इनसे सालाना लगभग 1.80 करोड़ रुपये की लीज आय बताई गई है।

एक कंपनी से खरीदे गए 40 विला-कॉटेज
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब ढाई साल की अवधि में शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी, दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर एक ही कंपनी से 40 संपत्तियां खरीदी गईं। इनमें अलवर जिले के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज शामिल हैं।
इन सभी संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है। खरीद के बाद इन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया, जिससे ये संपत्तियां खरीदी गई थीं। इस खरीद और लीज व्यवस्था को लेकर संपत्तियों के स्वामित्व, सौदे की प्रक्रिया और अधिकारियों की ओर से किए गए संपत्ति खुलासे यानी आईपीआर पर सवाल उठे हैं।
हर साल 1.80 करोड़ रुपये की लीज आय का दावा
रिपोर्टों के मुताबिक, उदयपुर के बुझड़ा में खरीदे गए 20 कॉटेज को चार लाख रुपये प्रति कॉटेज सालाना की दर से लीज पर दिया गया। वहीं, अलवर के अजबगढ़ स्थित 20 विला के लिए सालाना पांच लाख रुपये प्रति विला की दर बताई गई है।
| संपत्ति | संख्या | सालाना लीज दर | कुल सालाना आय |
|---|---|---|---|
| बुझड़ा, उदयपुर के कॉटेज | 20 | ₹4 लाख प्रति कॉटेज | ₹80 लाख |
| अजबगढ़, अलवर के विला | 20 | ₹5 लाख प्रति विला | ₹1 करोड़ |
| कुल | 40 | — | ₹1.80 करोड़ |
इस हिसाब से दोनों जगह की संपत्तियों से कुल सालाना लीज आय करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, संपत्तियों की खरीद और लीज से जुड़े सवालों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक पक्ष की जानकारी जरूरी है।
उद्योग और निवेश समेत कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे
APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। उनके पास उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), निवेश और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़े काम थे। वह RIICO के अध्यक्ष और निवेश संवर्धन से जुड़ी जिम्मेदारियों में भी शामिल रहे हैं।
कार्मिक विभाग के आदेश में APO किए जाने का कारण प्रशासनिक बताया गया है। उपलब्ध जानकारी में इस कार्रवाई को संपत्ति खरीद और लीज के मामले से सीधे जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
मुख्य सचिव पद की संभावित दावेदारी पर भी चर्चा
शिखर अग्रवाल का नाम राजस्थान के वरिष्ठ नौकरशाहों में प्रमुखता से लिया जाता रहा है। वह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
मौजूदा मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने की स्थिति में वरिष्ठ IAS अधिकारियों के बीच संभावित उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा चल रही थी। ऐसे में अग्रवाल के APO होने के बाद उनकी आगे की प्रशासनिक भूमिका और मुख्य सचिव पद की संभावित दावेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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