Automobile Desk : सीएनजी गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे उनका शानदार माइलेज और किफायती होना है। हालांकि, CNG कार का इस्तेमाल करते समय सिर्फ गाड़ी की नियमित सर्विसिंग या इंजन ऑयल बदलवाना ही काफी नहीं होता। एक और बेहद जरूरी पहलू है जिसकी ओर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते, और वह है कार में लगे सीएनजी सिलेंडर की सुरक्षा व उसकी जांच। CNG सिलेंडर में गैस अत्यधिक दबाव (हाई प्रेशर) के साथ भरी जाती है, इसलिए लंबे समय तक इसके लगातार उपयोग के बाद इसकी मजबूती और स्थिति का आकलन करना अनिवार्य हो जाता है। इसी जांच प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में हाइड्रोस्टेटिक टेस्ट या हाइड्रो टेस्ट कहा जाता है।

CNG सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग मुख्य रूप से इसकी संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों को परखने के लिए की जाती है। सालों-साल उपयोग में रहने के कारण सिलेंडर के अंदरूनी या बाहरी हिस्से में घिसावट, जंग या दबाव सहन करने की क्षमता में कमी आ सकती है। इस टेस्ट के दौरान सिलेंडर को पानी और विशेष उच्च दबाव की मदद से जांचा जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसमें कोई सूक्ष्म लीकेज या दरार तो नहीं है। यदि सिलेंडर इस कड़े परीक्षण को सफलतापूर्वक पार कर लेता है, तो उसे आगे के उपयोग के लिए सुरक्षित घोषित कर दिया जाता है और उसकी अगली जांच की समय-सीमा तय कर दी जाती है।
कानूनी और सुरक्षा नियमों के अनुसार, हर निजी CNG कार के सिलेंडर का हाइड्रो टेस्ट हर 3 साल में एक बार कराना अनिवार्य होता है। वहीं व्यावसायिक यानी कमर्शियल वाहनों के लिए यह समयावधि और भी कम हो सकती है। आपकी कार के सिलेंडर पर एक मेटल प्लेट या पंचिंग के जरिए आखिरी टेस्ट की तारीख अंकित होती है। गाड़ी मालिकों को समय-समय पर इस तारीख की जांच करते रहना चाहिए और वैधता समाप्त होने से पहले ही दोबारा टेस्टिंग करा लेनी चाहिए। समय सीमा खत्म होने के बाद बिना वैध टेस्ट सर्टिफिकेट के सीएनजी पंपों पर गैस भरवाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि CNG सिलेंडर की हाइड्रो टेस्टिंग किसी भी स्थानीय या अनाधिकृत गैरेज में नहीं कराई जा सकती। इसके लिए सरकार और विस्फोटक विभाग (PESO) द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकृत टेस्टिंग सेंटर्स पर ही जाना चाहिए। इन सेंटर्स के पास टेस्टिंग के लिए आवश्यक उपकरण और कुशल तकनीशियन होते हैं, जो सिलेंडर को कार से सुरक्षित रूप से निकालकर, उसकी पूरी जांच करते हैं और पास होने पर एक आधिकारिक प्रमाण पत्र व नई अनुपालन प्लेट जारी करते हैं।
खर्च की बात करें तो सीएनजी सिलेंडर के हाइड्रो टेस्ट की फीस विभिन्न शहरों, सिलेंडर की क्षमता और टेस्टिंग सेंटर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। औसतन इस पूरी प्रक्रिया में ₹1,500 से लेकर ₹3,000 तक का खर्च आता है। इसमें सिलेंडर को निकालने, उसकी सफाई, हाइड्रो टेस्टिंग और वापस फिटिंग का शुल्क शामिल होता है। किसी भी अप्रत्याशित खतरे से बचने और वाहन में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद मामूली खर्च है, जिसे नजरअंदाज करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।



