सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र में विकसित अवैध आवासीय कॉलोनियों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धुलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है. कोर्ट ने 16,726 अवैध निर्माण पर कार्रवाई और अन्य जोन में अवैध निर्माण चिन्हित करने के भी निर्देश दिए हैं.
मेरठ. सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र में विकसित अवैध आवासीय कॉलोनियों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है. पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धुलिया को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मेरठ विकास प्राधिकरण से जुड़े मामले में सितंबर 2026 के आदेश दर्ज हैं.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अवैध निर्माण की स्थिति को कानून के अनुसार ही देखा जाएगा. आदेश के तहत न्यायिक आयोग उल्देपुर में अवैध आवासीय कॉलोनियों के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेगा.
जमीन की होगी जांच
आयोग यह देखेगा कि जिन जमीनों पर कॉलोनियां विकसित की गईं, वे किसके स्वामित्व में थीं और उनकी खरीद-फरोख्त किस प्रक्रिया के तहत हुई. इसके अलावा कॉलोनियों के विकास के समय संबंधित अधिकारियों की तैनाती और उनकी ओर से की गई कार्रवाई की भी जांच की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जानने का निर्देश दिया है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित होती रहीं और प्राधिकरण की ओर से उस दौरान क्या कार्रवाई की गई. आयोग अवैध कॉलोनियों के विकास में प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगा.
आयोग के अध्यक्ष को आवश्यकता के अनुसार अन्य सदस्यों को शामिल करने का अधिकार भी दिया गया है.
16,726 निर्माण पर कार्रवाई
मामले में मेरठ विकास प्राधिकरण की ओर से बताया गया था कि शहर के ए जोन में 16,726 अवैध निर्माण हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इन अवैध निर्माणों को सील करने के निर्देश दिए हैं.
इसके साथ ही जोन बी, जोन सी और जोन डी में मौजूद अवैध निर्माणों की पहचान और चिन्हांकन कर रिपोर्ट पेश करने को भी कहा गया है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण वाले स्थानों पर सेटबैक की स्थिति की जांच की जाए और जहां अवैध निर्माण पाए जाएं, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाए.
सरकार को भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को न्यायिक आयोग के लिए सचिवालय और आवश्यक प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने को कहा है. प्रमुख सचिव आवास पी. गुरु प्रसाद को आयोग के अध्यक्ष के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है.
आयोग के सदस्यों के पारिश्रमिक के लिए राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर 35 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश भी दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 दिसंबर की तारीख निर्धारित की गई है.


