टुकेश्वर लोधी, आरंग। क्षेत्र के कुरुद और हरदीडीह सीमा पर महानदी तट पर दिन के उजाले में बेखौफ चल रहे अवैध रेत खनन और विभागीय लापरवाही को प्रमुखता से उजागर करने के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है। सोमवार को खनिज विभाग की टीम ने कुरुद खदान पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी है।
सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव खुद विभागीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान विभाग ने अवैध परिवहन एवं खनन में लिप्त 01 हाइवा वाहन और 01 ट्रैक्टर को जब्त किया है। इसके साथ ही भविष्य में माफिया द्वारा वाहनों के प्रवेश और अवैध परिवहन को पूरी तरह रोकने के लिए चैन माउंटिंग मशीन की मदद से खदान तक जाने वाले रास्तों को कटवा दिया गया है

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लल्लूराम डॉट कॉम की सतर्कता से टूटी प्रशासनिक नींद
गौरतलब है कि शनिवार देर रात खनिज विभाग की आधी-अधूरी कार्रवाई के महज कुछ ही घंटों बाद रेत माफिया का ‘सिंडिकेट’ पुनः सक्रिय हो गया था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों और स्थानीय ग्रामीणों के जनविरोध को दरकिनार कर सोमवार सुबह से दिनदहाड़े दर्जनों ट्रैक्टरों और जेसीबी मशीनों के जरिए नदी का सीना चीरकर अवैध उत्खनन जारी था। रायपुर, बेमेतरा और कवर्धा जैसे जिलों में बारीक रेत की अंतरजिला तस्करी और प्रति हाइवा ₹15,000 की अवैध वसूली के इस पूरे खेल को जब लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से प्रकाशित व प्रसारित किया, तब जाकर जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुली और मौके पर दबिश दी।

रेत खदान के आसपास सैकड़ों ट्राली रेत का अवैध भंडारण
आपको बता दें कि महानदी के जिस स्थान पर रेत का अवैध उत्खनन हो रहा था उसके आसपास सैकड़ों ट्राली रेत का अवैध भंडारण है। ट्रैक्टर के माध्यम से महानदी से रेत को बाहर निकालकर भंडारण किया जाता है, उसके बाद 15000 प्रति हाइवा वाहन की दर से रेत को बेचा जाता है। सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव ने आसपास सैकड़ों ट्राली रेत के अवैध भंडारण पर भी कार्रवाई की बात कही है।
रास्ते बंद होने से माफिया के हौसलों पर लगेगा ब्रेक
खनिज अधिकारियों द्वारा मार्ग को काटे जाने से अब भारी वाहनों की आवाजाही पर सीधे तौर पर ब्रेक लगेगा। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि महज कुछ वाहनों की जब्ती और रस्म अदायगी से माफिया का नेटवर्क खत्म नहीं होगा। शासन-प्रशासन को इस क्षेत्र में लगातार निगरानी रखनी होगी, ताकि सरकारी राजस्व को लग रहे लाखों के चूने और पर्यावरण की तबाही पर स्थायी अंकुश लगाया जा सके।
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