अमित पाण्डेय, डोंगरगढ़। ऑडिट टीम के लिए ग्राम पंचायतों में भोजन, चाय, नाश्ता और विश्राम की व्यवस्था कराने वाले जनपद पंचायत डोंगरगढ़ के आदेश पर Lalluram.com की खबर का बड़ा असर हुआ है। खबर प्रकाशित होने के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भगवती साहू ने अपने ही जारी आदेश को अगले ही दिन निरस्त कर दिया। नए आदेश में पुराने आदेश को “त्रुटिवश जारी” होना बताया गया है।

दरअसल, जनपद पंचायत डोंगरगढ़ की ओर से 24 अगस्त को ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अनुविभागीय अधिकारी को एक आदेश जारी किया गया था। इसमें महालेखाकार (लेखापरीक्षा) छत्तीसगढ़, रायपुर की टीम के 25 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले ऑडिट के दौरान ग्राम पंचायतों में भ्रमण, निरीक्षण और विश्राम के साथ भोजन, चाय-नाश्ते की आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में यह भी कहा गया था कि ऑडिट एवं ऑडिटरों के ग्राम पंचायतों में भ्रमण, निरीक्षण तथा विश्राम, भोजन आदि की आवश्यक व्यवस्था अपने अधीनस्थ उप अभियंताओं के साथ करना सुनिश्चित करें।

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Lalluram.com ने इस आदेश को प्रमुखता से उठाया और सवाल किया कि जिन पंचायतों के खातों और विकास कार्यों का ऑडिट होना है, उन्हीं स्तरों से ऑडिट टीम के लिए खान-पान और विश्राम की व्यवस्था कराने का निर्देश आखिर किस नियम के तहत दिया गया है। खबर सामने आने के बाद 25 अगस्त को जनपद पंचायत डोंगरगढ़ से नया आदेश जारी किया गया। सीईओ भगवती साहू ने 24 अगस्त के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए उसे त्रुटिवश जारी हुआ बताया और उसे निरस्त कर दिया। यानी जिस आदेश में एक दिन पहले ऑडिट टीम के लिए भोजन, चाय-नाश्ता और विश्राम की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए गए थे, उसे महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में यही सबसे अहम बात है।

अब सवाल यह है कि अगर पहला आदेश वास्तव में त्रुटिवश जारी हुआ था, तो उसमें ऑडिट टीम के भोजन, चाय-नाश्ते और विश्राम की व्यवस्था का निर्देश किस आधार पर शामिल किया गया था? साथ ही 24 अगस्त के आदेश में जिस 17 अगस्त के महालेखाकार कार्यालय के पत्र को संदर्भ बनाया गया था, उसमें वास्तव में क्या निर्देश दिए गए थे? फिलहाल नए आदेश के बाद ग्राम पंचायतों और अधीनस्थ अधिकारियों के जरिए ऑडिट टीम के लिए भोजन, चाय-नाश्ते और विश्राम की व्यवस्था कराने वाला निर्देश वापस ले लिया गया है। Lalluram.com की खबर के बाद एक घंटे के भीतर आदेश का निरस्त होना इस पूरे मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन माना जा रहा है। अब देखना होगा कि 17 अगस्त के मूल पत्र में ऑडिट टीम के संबंध में वास्तविक निर्देश क्या थे और इस मामले में आगे कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।

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