कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वंदे मातरम को लेकर कहा कि उनका धर्म उन्हें इसके पूरे गायन की अनुमति नहीं देता, लेकिन वह राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े रहेंगे. उन्होंने देश के लिए जान देने की बात कहते हुए राष्ट्रगीत के शब्दों और उपासना पद्धति पर अपनी आपत्ति भी स्पष्ट की.

सहारनपुर. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वंदे मातरम के गायन को लेकर अपना रुख दोहराते हुए कहा है कि वह राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े रहेंगे, लेकिन इसका गायन नहीं करेंगे. सहारनपुर से सांसद मसूद ने अपने बयान में कहा कि उनका धर्म उन्हें वंदे मातरम के पूरे पाठ की अनुमति नहीं देता, हालांकि उन्होंने राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान व्यक्त करने की बात भी कही.

खुद को बताया हिंदुस्तानी मुसलमान

एक पत्रकार ने इमरान मसूद से पूछा कि वह पहले हिंदुस्तानी हैं या मुसलमान. इस पर कांग्रेस सांसद ने खुद को हिंदुस्तानी मुसलमान बताया. उनसे यह भी पूछा गया कि क्या वह राष्ट्र के सम्मान के लिए वंदे मातरम पर अपने 17 अगस्त 2026 के बयान से पीछे हटेंगे.

मसूद ने जवाब दिया कि उनका धर्म उन्हें पूरा वंदे मातरम पढ़ने की अनुमति नहीं देता. उन्होंने कहा कि वह अल्लाह के अलावा किसी अन्य की उपासना नहीं कर सकते. देश की उपासना से जुड़े सवाल पर भी उन्होंने इसी धार्मिक मान्यता का हवाला दिया और सुप्रीम कोर्ट की ओर से सम्मान की परिभाषा तय किए जाने का उल्लेख किया.

वंदे मातरम के शब्दों पर आपत्ति

कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह देश के लिए अपनी जान देने और गर्दन कटवाने को तैयार हैं तथा भारत माता की जय भी बोलेंगे, लेकिन सजदा नहीं करेंगे. उनके मुताबिक, वंदे मातरम की शुरुआती चार पंक्तियों के बाद आने वाले हिस्से में पूरी पूजा पद्धति शामिल है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के शुरुआती दो अंतरों को गाया जाता है, लेकिन वह स्वयं इसे नहीं गाते. उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उन्हें इसके शब्द याद नहीं हैं और वह जन गण मन गाते हैं, क्योंकि उन्हें वह याद है. मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें वंदे मातरम से नहीं, बल्कि इसके शब्दों से आपत्ति है. उन्होंने कहा कि उनकी धार्मिक मान्यता के अनुसार अल्लाह के अलावा किसी के सामने सजदा नहीं किया जा सकता.

सम्मान में खड़े रहने की बात

इमरान मसूद ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1998 में सम्मान के संबंध में परिभाषा दी थी. इसी आधार पर उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के गायन के दौरान वह खड़े रहेंगे, लेकिन इसका पाठ नहीं करेंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी से नमाज पढ़ने के लिए नहीं कहते, इसलिए अपनी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत किसी पूजा पद्धति का पालन नहीं करेंगे. मसूद के अनुसार, राष्ट्रगीत के बहाने उनसे जो करवाने की कोशिश की जा रही है, वह ऐसा नहीं करेंगे, लेकिन राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान करेंगे.

पहले भी दे चुके हैं बयान

इससे पहले 17 अगस्त 2026 को भी इमरान मसूद ने कहा था कि वह किसी भी परिस्थिति में वंदे मातरम का गायन नहीं करेंगे. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि जहां भी राष्ट्रगीत गाया जाएगा, वहां वह उसके सम्मान में खड़े रहेंगे.