हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में हुई एक दर्दनाक मौत ने सिर्फ एक परिवार का सहारा नहीं छीना, बल्कि पुलिस और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ऐसा हाथी, जिसे शहर में लाने को लेकर अनुमति और निगरानी जैसे सवाल उठ रहे हैं, वह उज्जैन से इंदौर तक पहुंच गया, शहर की सड़कों पर घूमता रहा, धार्मिक आयोजन में शामिल हुआ और फिर एक व्यक्ति की जान चली गई। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पूरे घटनाक्रम को कैमरे में कैद कर दिया, जबकि इस मामले में गिरफ्तार महावत को जमानत भी मिल चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि इस मौत की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
शहर में कैसे पहुंच गया हाथी?
इंदौर में पुलिस की चेकिंग व्यवस्था और शहर की सीमाओं पर निगरानी के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। भारी वाहनों की जांच होती है, संदिग्धों पर नजर रखी जाती है, लेकिन इतने विशाल वन्यजीव का शहर में प्रवेश कैसे हो गया? यदि हाथी को लाने के लिए वैधानिक अनुमति भी नहीं, इसी तरह वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वन्यजीवों की निगरानी की जिम्मेदारी रखने वाला विभाग आखिर तब कहां था, जब हाथी एक जिले से दूसरे जिले में पहुंच गया?
सीसीटीवी में कैद हुआ मौत का पूरा घटनाक्रम
25 जुलाई की शाम चंदन नगर थाना क्षेत्र की राजनगर पुलिस चौकी के सामने हुई घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। फुटेज में हाथी के बेकाबू होने की घटना कैद है।पुलिस के अनुसार, जुलूस के दौरान महावत द्वारा हाथी के सिर पर डंडा मारने के बाद वह भड़क गया। गुस्साए हाथी ने विजय पिता लक्ष्मण सिंह होलकर को सूंड से उठाकर पटक दिया और फिर उसके ऊपर पैर रख दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
27 घंटे बाद दर्ज हुई एफआईआर
इतनी गंभीर घटना के बावजूद पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। हादसे के करीब 27 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई। चंदन नगर थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 926/2026 दर्ज कर महावत उमेश गोस्वामी को गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में जमानत मिल गई। महावत की जमानत के बाद अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित रहेगी या फिर पूरे घटनाक्रम की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी तय होगी।
हाथी को वापस ले जाया गया, किसी ने नहीं रोका
घटना के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हाथी को वापस उज्जैन ले जाया गया। सवाल यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद क्या वन विभाग ने हाथी को अपने कब्जे में लिया? क्या पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की? या फिर पूरा प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझा रहा?
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