भारतीय रेलवे द्वारा देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेन का हाई स्पीड परीक्षण हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर आयोजित किया जा रहा है। लखनऊ से आ रही आरडीएसओ की विशेषज्ञ टीम इस आधुनिक और प्रदूषण मुक्त हाइब्रिड ट्रेन के सभी सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच करेगी।
जींद। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, क्योंकि देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन के हाई स्पीड परीक्षण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस ऐतिहासिक India First Hydrogen Train Trial Run की कमान संभालने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की विशेषज्ञ टीम बुधवार को लखनऊ से जींद जंक्शन पहुंच रही है। यह महत्वपूर्ण परीक्षण जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर आयोजित किया जाएगा, जहाँ ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौड़ाकर परखा जाएगा। पहले यह हाई स्पीड ट्रायल 24 जून को होना निर्धारित था, लेकिन कुछ तकनीकी बदलावों के कारण अब इसे आगामी 26 जून को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले कम गति वाले शुरुआती परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।

आरडीएसओ टीम करेगी सुरक्षा मानकों की जांच
इस गति परीक्षण के माध्यम से रेलवे के विशेषज्ञ ट्रेन के विभिन्न जटिल तकनीकी और यांत्रिक पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे। आरडीएसओ की टीम मुख्य रूप से ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम, आपातकालीन नियंत्रण उपकरण, इंजन की वास्तविक क्षमता, सुरक्षा मानकों, तेज गति में होने वाले कंपन और ट्रैक पर स्थिरता का बारीकी से मूल्यांकन करेगी। इसके अलावा अलग-अलग गतियों पर पावर कार, स्पीड सेंसर और कंट्रोल सिस्टम को भी परखा जा रहा है। वर्तमान में जींद से सोनीपत के बीच यात्रियों के लिए तीन सामान्य ट्रेनें संचालित हो रही हैं, लेकिन इस नई ट्रेन के आने से रूट पर यात्रा सुगम हो जाएगी। यह ट्रेन पूरी तरह ध्वनि रहित होगी, जिससे यात्रियों को सफर के दौरान शोर से मुक्ति मिलेगी और एक आरामदायक अनुभव प्राप्त होगा।

फ्यूल सेल तकनीक से चलेगी हाइब्रिड ट्रेन
जींद से सोनीपत के बीच की कुल दूरी लगभग 90 किलोमीटर है और यह हाइब्रिड ट्रेन भविष्य में 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की व्यावसायिक रफ्तार से पटरियों पर दौड़ने में सक्षम होगी। इस ट्रेन में आठ से दस डिब्बे होंगे, जो लिथियम आयन बैटरी और सुपर कैपेसिटर जैसे उन्नत अक्षय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों से लैस होंगे। इसके विशेष इंजन में डीजल के स्थान पर फ्यूल सेल का उपयोग किया जाएगा, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण भेजा जाता है। ऑक्सीजन की उपस्थिति में हाइड्रोजन के नियंत्रित दहन से भारी मात्रा में बिजली पैदा होगी, जो सीधे बैटरी को चार्ज करेगी। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले धुएं की जगह केवल शुद्ध भाप और पानी का उत्सर्जन होगा।

