रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में गोला-बारूद की बढ़ती मांग से भारतीय डिफेंस कंपनियों को कमाई का बड़ा मौका मिला है. भारत ने एक साल में 8 हजार करोड़ से ज्यादा के डिफेंस साजो-समान यूरोप को बेचे हैं. इसमें गोला-बारूद और कई हथियार शामिल हैं. यूरोप हथियारों के लिए भारत पर निर्भर हो रहा है और भारत दक्षिण कोरिया के बाद यूरोप का दूसरा बड़ा गोला-बारूद सप्लायर बन गया है.

2020 तक एक ऐसा भी समय रहा कि भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार था, लेकिन अब पासा पलटने के साथ साथ तस्वीर भी बदल रही है.

भारतीय कंपनियों ने रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय देशों को कम से कम 87.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 7,000 करोड़ रुपये का गोला-बारूद निर्यात किया है. आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध से पहले के चार साल की तुलना में यूरोप को भारत का यह निर्यात 1,600 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है. 

भारत का रक्षा उद्योग (Defence Industry) यूरोप और यूक्रेन के सहयोगी देशों के साथ-साथ इजराइल को भी हथियारों की सप्लाई कर रहा है. मार्च 2026 तक के दो साल में भारत ने इजराइल को करीब 630 करोड़ रुपये के गोला-बारूद और विस्फोटक भेजे.

भारत अब दक्षिण कोरिया के बाद इस क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा गोला-बारूद सप्लायर है। चार साल पहले 28वें स्थान पर था. वहीं, मार्च 2026 तक भारत इजराइल को विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन के पुर्जे सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा विदेशी आपूर्तिकर्ता बन गया, जो 2023 में नौवें स्थान पर था.

19 अप्रैल 2024 को भारत ने साउथ चाइना सी में चीन को टक्कर दे रहे फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप सौंपी थी. दरअसल, फिलीपींस पहला ऐसा देश है, जिसे भारत ने ब्रह्मोस बेचा है. सरकार ने अप्रैल में बताया था कि मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष के दौरान भारत का कुल डिफेंस निर्यात 63% बढ़कर 4 अरब डॉलर हो गया.

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