केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के ‘रिजीम चेंज’ (Regime Change) संबंधी बयानों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत बांग्लादेश नहीं है और देश में सरकार का भविष्य जनता के जनादेश से तय होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच इस बयान से सियासी घमासान तेज हो गया है।

‘भारत बांग्लादेश नहीं’, किरेन रिजिजू का विपक्ष पर हमला

रिजिजू ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “बड़े आए ‘रिजीम चेंज’ करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है!”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय युवा देश को तोड़ने के बजाय उसके निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने खेल, कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक और संस्कृति के क्षेत्र में युवाओं की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

SIR विवाद और बांग्लादेश मॉडल की चर्चा

यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शनों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर उठा है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के बयानों में ‘रिजीम चेंज’ का मुद्दा चर्चा में आया। कुछ छात्र कार्यकर्ताओं ने इन विरोध प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन से भी की।

BJP नेताओं ने विपक्ष को घेरा

भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी देश में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, भाजपा नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान तिरंगे के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।

‘रिजीम चेंज’ शब्द पर कांग्रेस का पलटवार

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान की आलोचना की। इसके जवाब में चिदंबरम ने एक्स पर कहा कि लोकतंत्र में ‘रिजीम चेंज’ यानी सरकार का बदलना सामान्य प्रक्रिया है।

इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अब विवाद केवल SIR और चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहकर लोकतंत्र, जनादेश और राजनीतिक विरोध की सीमाओं पर भी केंद्रित हो गया है।

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