भारतीय वायुसेना (IAF) को अपने फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या मजबूत बनाए रखने के लिए हर साल करीब 36 से 40 नए लड़ाकू विमान शामिल करने की जरूरत है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि यह रफ्तार वायुसेना को मौजूदा जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार रखने में अहम होगी।
हर साल 30-35 फाइटर जेट शामिल करने की योजना
वायु सेना दिवस से पहले मीडिया से बातचीत में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि अगर मौजूदा योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो IAF हर साल 30 से 35 फाइटर जेट शामिल करना शुरू कर सकती है।
उन्होंने बताया कि HAL के जरिए LCA तेजस Mk1A की उत्पादन क्षमता बढ़ने, MRFA प्रोग्राम के तहत 114 लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद और अतिरिक्त Su-30MKI विमानों की योजना से सालाना करीब 40 एयरक्राफ्ट शामिल करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
स्वदेशी ASTRA मिसाइल और BVR क्षमता पर जोर
एयर चीफ मार्शल ने ASTRA और अन्य BVR (Beyond Visual Range) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के जरिए भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने स्वदेशी हथियार प्रणालियों के साथ लंबी दूरी की विदेशी मिसाइलों को शामिल करने की जरूरत भी बताई।
पाकिस्तान के J-35 पर IAF चीफ की चिंता
पाकिस्तान द्वारा चीन के J-35 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट हासिल करने की रिपोर्टों पर एपी सिंह ने चिंता जताई। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी चुनौती का आकलन केवल एक एयरक्राफ्ट के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि उसे पूरे सैन्य सिस्टम में कितनी प्रभावी तरह से एकीकृत किया जाता है।
AMCA में देरी पर विकल्प जरूरी
एपी सिंह ने Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम में संभावित देरी की स्थिति में वैकल्पिक विकल्पों पर विचार करने की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि रूस ने Su-57 की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
उनके मुताबिक, अगर विरोधी देश पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल कर रहे हैं, तो भारत को भी अपनी फिफ्थ-जेनरेशन एयर कॉम्बैट क्षमता को मजबूत करने पर गंभीरता से विचार करना होगा।
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