हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर अभिनेता बिन्दू दारा सिंह अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं। इस बार उनके निशाने पर आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z, मोबाइल की बढ़ती लत और सोशल मीडिया की दुनिया रही। एक साक्षात्कार में उन्होंने आधुनिक पीढ़ी के एक वर्ग पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज कुछ युवा अपनी संस्कृति, इतिहास और देश के संघर्षों से अनजान होते जा रहे हैं। उन्होंने मोबाइल की जरूरत को स्वीकार किया, लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि अब इंसान मोबाइल नहीं चला रहा, बल्कि मोबाइल इंसान को चला रहा है। Gen-Z पर टिप्पणी करते हुए बिन्दू दारा सिंह ने यहां तक कह दिया कि कभी कोई खुद को कॉकरोच पार्टी कहता है, तो कभी गटर पार्टी। उनके मुताबिक, युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि देश ने किन संघर्षों से गुजरकर आज का मुकाम हासिल किया है। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने, मोबाइल की गुलामी से बाहर निकलने और अपनी प्रतिभा को सही दिशा देने की अपील भी की।
‘कभी कॉकरोच पार्टी, कभी गटर पार्टी’, Gen-Z के एक वर्ग पर फूटा गुस्सा
आज की युवा पीढ़ी के व्यवहार और बदलती जीवनशैली पर सवाल उठाते हुए बिन्दू दारा सिंह ने Gen-Z के एक वर्ग को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि आज देश के बच्चे मंदिरों में जाकर संस्कार सीख रहे हैं, लेकिन युवाओं की एक ऐसी पीढ़ी भी है जो अपनी दिशा से भटक रही है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि “इंडिया के बच्चे अभी भी मंदिरों में संस्कार सीख रहे हैं, लेकिन एक जनरेशन है जो पूरी तरह भटक गई है, जो खुद को Gen-Z कहती है। कभी कॉकरोच पार्टी बन जाती है तो कभी गटर पार्टी! इन्हें पता ही नहीं है कि हम किस दौर से निकलकर यहां तक आए हैं।” उनकी इस टिप्पणी में निशाने पर युवाओं की वह जीवनशैली रही, जिसमें सोशल मीडिया का दिखावा और ट्रेंड कई बार वास्तविक जीवन, संस्कार और इतिहास से ज्यादा अहम हो जाते हैं।
मोबाइल ने हमें बर्बाद कर दिया’, अब इंसान नहीं मोबाइल चला रहा है इंसान को
बिन्दू दारा सिंह ने मोबाइल एडिक्शन को आज के दौर की बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि स्मार्टफोन अब जरूरत से कहीं आगे निकल चुका है। बैंकिंग, ऑफिस, समय देखने और अलार्म जैसी तमाम सुविधाएं मोबाइल में मौजूद हैं, इसलिए इससे पूरी तरह दूर रहना आसान नहीं है। लेकिन जरूरत और गुलामी के बीच फर्क समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि “मोबाइल के अंदर बैंक, ऑफिस, टाइम, अलार्म सब समा गया है। इसके बिना रहना नामुमकिन है, लेकिन हमें खुद को इसका गुलाम बनने से रोकना होगा। अब उल्टा हो रहा है- हम मोबाइल को नहीं, मोबाइल हमें चला रहा है।” उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे हर समय मोबाइल और सोशल मीडिया में उलझे रहने के बजाय असल जिंदगी की गतिविधियों के लिए भी समय निकालें।
रील और इंस्टाग्राम से बाहर निकलो, गार्डनिंग-पेंटिंग में लगाओ ध्यान
अभिनेता ने युवाओं से अपील की कि वे केवल रील बनाने, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर समय बिताने को ही अपनी दुनिया न बना लें। इसके बजाय गार्डनिंग, आर्ट और पेंटिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ें। उनके मुताबिक, ऐसी गतिविधियां युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे बेहतर बनाने का मौका देती हैं। उन्होंने वैष्णवी यूनिवर्सिटी के छात्रों के कलात्मक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया से हटकर भी अपनी रचनात्मकता को निखारने के कई रास्ते हैं। मोबाइल और वाई-फाई से निकलने वाली तरंगों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई।
जय श्रीराम’ बोलना काफी नहीं, बच्चों को इसका इतिहास और भाव भी समझाएं
भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व और धार्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के सवाल पर बिन्दू दारा सिंह ने कहा कि बच्चों को केवल धार्मिक नारे या शब्द सिखाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें उनके पीछे छिपे भाव, इतिहास और महत्व को भी समझाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज भारत का छोटा से छोटा बच्चा भी ‘जय श्रीराम’ बोल रहा है, लेकिन माता-पिता का यह फर्ज है कि वे उन्हें समझाएं कि इसके पीछे का भाव और इतिहास क्या है।” रामायण जैसी विशाल गाथाओं को युवाओं तक पहुंचाने के लिए उन्होंने कला और दृश्य माध्यमों को उपयोगी बताया।
महाकाल’ शो के जरिए शिव-शक्ति और 51 शक्तिपीठों का महत्व समझाने की पहल
अपनी सांस्कृतिक पहल का जिक्र करते हुए बिन्दू दारा सिंह ने बताया कि उन्होंने ‘महाकाल’ नाम से ढाई घंटे का विशेष शो तैयार किया है। इस शो के जरिए लोगों को 51 शक्तिपीठों का महत्व, शिव-शक्ति और अर्धनारीश्वर की अवधारणा को सहज तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है। उनका मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया जाए तो नई पीढ़ी भी उनसे जुड़ सकती है।
‘उल्टा-पुल्टा प्रदेश’ से 24 घंटे बिजली तक, यूपी के बदलाव का दिया उदाहरण
उत्तर प्रदेश में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए बिन्दू दारा सिंह ने पुराने दौर और वर्तमान स्थिति की तुलना की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश में 20 घंटे बिजली जाती थी और महज चार घंटे बिजली आती थी। इसी वजह से लोग उसे ‘उल्टा-पुल्टा प्रदेश’ कहते थे। उन्होंने दावा किया कि आज उसी उत्तर प्रदेश में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है और व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने नेतृत्व और विकास की दिशा पर अपनी राय रखी।
‘देश सही हाथों में है’, भ्रष्टाचार को अब भी बड़ी चुनौती माना
देश की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर बात करते हुए बिन्दू दारा सिंह ने कहा कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और सही हाथों में है। हालांकि, उन्होंने भ्रष्टाचार को अब भी एक बड़ी समस्या बताया। उनके मुताबिक, भ्रष्टाचार को पूरी तरह रोकना मुश्किल चुनौती बना हुआ है, लेकिन देश का विकास सही दिशा में जारी है।युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना हरकतों से बचने की बात कही। उनका कहना था कि जनता अब समझती है कि कौन देश के लिए काम कर रहा है और कौन नहीं। बिन्दू दारा सिंह के इस बयान में मोबाइल की लत, Gen-Z की जीवनशैली, धार्मिक संस्कार और देश के विकास जैसे कई मुद्दे एक साथ सामने आए। खास तौर पर ‘कॉकरोच पार्टी’ और ‘गटर पार्टी’ वाली टिप्पणी ने उनके बयान को चर्चा में ला दिया है।

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