हेमंत शर्मा, इंदौर। अदालत में जमानत के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेजों से छेड़छाड़ करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। इंदौर की अदालत ने शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हाकम सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में सजा के साथ कुल 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जिला लोक अभियोजन के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नमिता द्विवेदी की अदालत ने एमजी रोड थाने के अपराध में फैसला सुनाया। सांवेर निवासी हाकम सिंह को धारा 467, 468 और 471 के तहत तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और धारा 420 के तहत दो साल के सश्रम कारावास से दंडित किया गया।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, मामला साल 2004 में अदालत में पेश की गई जमानत से जुड़ा है। हाकम सिंह ने 9 अगस्त 2004 को एक आपराधिक प्रकरण में लवली उर्फ दुर्गा की जमानत ली थी। न्यायालय ने जमानत स्वीकार कर ली थी और इसके लिए बुक क्रमांक 80471 पर दस्तावेज दर्ज किए गए थे।इसके बाद दूसरे प्रकरण में राजेंद्र सिंह की जमानत पेश की गई। आरोप है कि इस दौरान पहले मामले में दर्ज जमानत से संबंधित कागज फाड़कर उनकी जगह नए कागज लगा दिए गए। न्यायालय के तत्कालीन पीठासीन अधिकारी विजय सिंह कावछा ने दस्तावेजों में हेरफेर को लेकर शिकायत की थी।
न्यायालय की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस
शिकायत के आधार पर एमजी रोड थाना पुलिस ने वर्ष 2005 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। पुलिस ने जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोपी को गिरफ्तार किया। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष ने की पैरवी
इस मामले में अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी आरती रजौरिया ने पैरवी की। जिला लोक अभियोजन संचालनालय, इंदौर के उपनिदेशक आशीष कुमार खरे ने फैसले की जानकारी दी।
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