हेमंत शर्मा, इंदौर। 25 लाख से ज्यादा की MD ड्रग्स जब्त… पीठ थपथपाती इंदौर क्राइम ब्रांच… और कैमरे के सामने खड़े सिर्फ दो आरोपी! लेकिन वो तीसरा चेहरा कहां गायब हो गया? पिपलिया मंडी का शादाब कुरैशी-जिसके नाम की हवाओं से लेकर थाने के गलियारों तक गूंजा, वो प्रेस कॉन्फ्रेंस की टेबल तक पहुंचते-पहुंचते अचानक ‘अदृश्य’ कैसे हो गया? क्या यह महज तफ्तीश की गोपनीयता है या फिर खाकी के ‘शुभ-लाभ’ का वो खेल, जिसकी बू अब महसूस की जा रही है?
तीन को दबोचा, तो मीडिया को ‘दो’ का ही ‘दर्शन’ क्यों?
दावा नशे के खिलाफ जंग का, लेकिन नीयत पर सवालों की भारी बौछार! 25.40 लाख रुपए की ड्रग्स और पल्सर बाइक के साथ पकड़े गए आरोपियों के इस हाई-प्रोफाइल मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच की चाल-ढाल खुद संदिग्ध बन चुकी है।तस्करी का जाल मंदसौर से जुड़ा था, तीन बंदों को उठाए जाने की पूरी चर्चा थी। लेकिन जब मीडिया के कैमरे चमके, तो सिर्फ दो चेहरे सामने लाए गए। शादाब कुरैशी का नाम दबाने की यह जल्दबाजी किस ‘डील’ का नतीजा है?
‘शुभ-लाभ’ का खेल या कार्रवाई का अधूरा सच?
जब-जब नशे की बड़ी खेप पकड़ी जाती है, तब-तब इंदौर में ‘सेटिंगबाजी’ के जिन्न बोतल से बाहर आते हैं। सवाल सीधा है—क्या किसी आरोपी को राहत देने का यह नया ‘मॉडेल’ है? क्यों शादाब कुरैशी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरफ्तार नहीं बताया गया हालांकि इस मामले में जब क्राइम ब्रांच टी से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि उसका प्रेस नोट कल जारी किया जाएगा लेकिन सवाल खड़े होते हैं कि ऐसी कौन सी वह पूछताछ बाकी रह गई थी जिसके चलते साद कुरैशी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं पेश किया गया या फिर उसकी गिरफ्तारी भी डाली गई या नहीं इस पर भी सवाल खड़े होते हैं।
25 लाख की ड्रग्स मिली, पर असली ‘आका’ का हिसाब कहां?
254 ग्राम MD ड्रग्स… कीमत 25 लाख 40 हजार। बाइक मिलाकर कुल 26.40 लाख का मशरूका। कागजों पर आंकड़े बड़े शानदार हैं! लेकिन जनाब, यह माल आया कहां से? किसे डिलीवर होना था? और इस पूरे सिंडिकेट में उस ‘तीसरे बंदे’ की क्या हैसियत थी?
सिर्फ दो प्यादों को जेल भेजकर क्या क्राइम ब्रांच ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है? या फिर असली सरगना तक पहुंचने से पहले ही किसी की जेबें गर्म हो गईं?
आकाओं की खामोशी… और टूटता भरोसा!
खाकी का काम सिर्फ वाही-वाही लूटना नहीं, पारदर्शिता बनाए रखना भी है। जब नशे के सौदागरों पर कार्रवाई के नाम पर ‘पर्दादारी’ होने लगे, तो फिर सवाल उठना लाजिमी है।क्या यह महज़ सूचना छिपाने की कोई नादानी थी… या फिर ‘सेटिंगबाजी’ के नाम पर चला कोई बड़ा खेल? क्राइम ब्रांच की इस खामोशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि आला अधिकारी इस ‘शुभ-लाभ’ वाले खेल के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं। तीसरे आरोपी की भूमिका, उसकी कानूनी स्थिति और पुलिस कार्रवाई का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
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