हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के कानून-व्यवस्था के दावों पर 1 अक्टूबर की शाम एक बार फिर जोरदार तमाचा पड़ा, जब ग्रीन पार्क कॉलोनी में सरेआम पिस्तौलें चमकीं और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा। बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी और जान से मारने की नीयत से की गई फायरिंग ने यह साबित कर दिया कि शहर में अपराधियों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में 3 दिनों तक दहशत और सन्नाटा पसरा रहा और चंदन नगर पुलिस को इन नामजद और आदतन बदमाशों को ढूंढकर शिकंजे में लेने में पूरे 72 घंटे का लंबा वक्त लग गया। सवाल उठना लाजमी है कि अगर इन तीन दिनों के दौरान ये सिरफिरे बदमाश किसी की जान ले लेते या किसी और बड़ी अनहोनी को अंजाम दे देते, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?

पुराने विवाद में दुस्साहस

सरेराह पिस्टल लहराकर लिखी खौफ की इबारत घटनाक्रम के मुताबिक, फरियादी मोहम्मद समीर खान अपने साथी के साथ एक्टिवा से जा रहा था। पुरानी रंजिश और समझौते के विवाद को लेकर बेखौफ बदमाशों ने ब्लैक थार और एक्टिवा से उनका फिल्मी अंदाज में पीछा किया। आरोपियों ने न केवल उनका रास्ता रोका और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि आरोपी मोनू उर्फ मुसेफ ने आव देखा ना ताव और जान से खत्म करने की नीयत से सीधी फायरिंग कर दी। गोली चलते ही क्षेत्र में भगदड़ मच गई और आम नागरिक अपनी जान बचाकर भागने लगे। जब कागज पर सिमट गई पुलिसिया मुस्तैदी: आदतन अपराधियों के आगे लाचार खाकी पकड़े गए आरोपियों का काला चिट्ठा खुद चीख-चीखकर पुलिस गश्त और मुस्तैदी के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।

  • मोनू उर्फ मुसेफ (20 वर्ष): इसके खिलाफ पहले से 06 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
  • दानिश उर्फ फाइव स्टार (18 वर्ष): इसके खिलाफ 04 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
  • अल्फ़ाइज (18 वर्ष): यह भी पहले से 01 अपराध में शामिल रहा है।
  • इनके साथ एक नाबालिग को भी अपराध की इस भट्ठी में झोंका गया था।

हैरानी की बात यह है कि इन सभी बदमाशों पर पुलिस पहले भी ‘प्रतिबंधात्मक कार्रवाई’ और ‘बाउंड ओवर’ का कागजी चाबुक चला चुकी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये अपराधी पुलिसिया कागजों को रद्दी का टुकड़ा समझते हुए हाथों में अवैध देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस लेकर बेखौफ घूमते रहे।

3 दिन बाद जागी पुलिस, प्रेस नोट में ‘सराहनीय’ खुदगर्जी की पटकथा

वारदात के पूरे 3 दिन बीत जाने के बाद, चंदन नगर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल, जिंदा राउंड, थार गाड़ी, एक्टिवा और खाली खोखा जप्त करने में सफलता पाई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जारी किया गया आधिकारिक प्रेस नोट पुलिसिया कार्यशैली पर और बड़ा सवाल खड़ा करता है। 3 दिनों तक आम जनता को खौफ और असुरक्षा के साए में छोड़ने के बावजूद, पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बेशर्मी से इसे “घटना के चंद घंटों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई” करार दिया गया। प्रेस नोट का एक-एक शब्द अधिकारियों और पुलिस टीम की “सराहनीय भूमिका” की अपनी ही पीठ थपथपाने की कहानी गढ़ता नजर आया।

बड़ा सवाल

आदतन अपराधी जब सरेआम गोलियां चलाकर आसानी से फरार हो जाते हैं और उन्हें ढूंढने में पुलिस को 72 घंटे पापड़ बेलने पड़ते हैं, तो क्या इसे ‘तत्परता’ कहा जाएगा या खाकी की नाकामी और सुस्त रवैया? फिलहाल पुलिस जप्त पिस्टल की खरीद-फरोख्त और नेटवर्क को खंगालने की रटी-रटाई बात कह रही है, लेकिन चंदन नगर के रहवासी आज भी इस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पाए हैं और पुलिस के इस ‘सरकारी ड्रामे’ पर सवाल उठा रहे हैं।

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