हेमंत शर्मा, इंदौर। साइबर ठगी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में इंदौर से एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने देशभर के साइबर ठगों को ठगी के लिए तैयार APK फाइलें उपलब्ध कराईं। खजराना थाना पुलिस और मुंबई महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में पंकज पिता अवधेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी इंदौर में रहकर साइबर ठगों के लिए फर्जी एप तैयार करता और उन्हें उपलब्ध कराता था। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में दावा किया गया है कि आरोपी ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को बेचीं। इन फाइलों के जरिए देशभर में करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अब तक करीब 15.75 करोड़ रुपये की ठगी का पता चल चुका है। पुलिस को आशंका है कि वास्तविक ठगी की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। आरोही पंकज मुल्तान नागदा का रहने वाला है।
गेमिंग ऐप से शुरू हुआ सफर, साइबर ठगी के APK तक पहुंचा
जांच में सामने आया है कि पंकज ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं की और बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी। शुरुआत में वह गेमिंग ऐप तैयार करने का काम करता था। इसी दौरान उसने APK फाइल बनाने की तकनीक सीखी।बाद में उसका संपर्क साइबर ठगी करने वाले लोगों से हुआ और कथित तौर पर उसने इसी तकनीकी जानकारी को ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐप बनाने में लगा दिया।पुलिस के अनुसार वह करीब तीन साल से साइबर ठगों को ऐसे ऐप उपलब्ध करा रहा था।
बैंक मैनेजर बनकर KYC का डर… फिर खाली कर देते थे खाता
पूछताछ में आरोपी ने साइबर ठगी के एक तरीके के बारे में भी जानकारी दी है। साइबर ठग खुद को कभी SBI, HDFC या किसी अन्य बैंक का अधिकारी या मैनेजर बताकर लोगों से संपर्क करते थे।लोगों को कहा जाता था कि उनकी KYC बंद हो गई है या बैंक खाता जल्द बंद हो सकता है। इसके बाद उन्हें KYC अपडेट करने के नाम पर फर्जी लिंक या APK भेजी जाती थी।कई मामलों में QR कोड के जरिए भी लोगों को जाल में फंसाने की बात सामने आई है।
पहले 5 रुपये का खेल… फिर खाते का पूरा बैलेंस साफ
साइबर ठग कभी-कभी लोगों से कहते थे कि QR कोड पर 5 भेजकर अपना बैलेंस चेक कर लें। जैसे ही पीड़ित बताए गए तरीके से प्रक्रिया पूरी करता, उसके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती थी।इसके बाद खाते से रकम निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का खेल शुरू हो जाता था।यानी 5 का भरोसा और उसके बाद खाते से लाखों रुपये गायब।
पंकज बनाता था ठगों के लिए ‘फर्जी ऐप’
पुलिस के मुताबिक पंकज खुद हर पीड़ित को फोन करके ठगी नहीं करता था। उसका कथित काम साइबर ठगों के लिए फर्जी APK तैयार करना था।इन APK को अलग-अलग सरकारी सेवाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं और वेरिफिकेशन के नाम दिए जाते थे, ताकि आम व्यक्ति उन्हें देखकर भरोसा कर ले।
जांच में ऐसे नाम सामने आए हैं
- पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन
- सीनियर सिटीजन कार्ड
- RTO चालान
- क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन/अपडेट
- KYC और बैंकिंग अपडेट से जुड़े नाम
इन नामों के पीछे छिपी APK फाइलों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को गुमराह करने और उनके मोबाइल से संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता था।
2905 APK… हजारों लोग निशाने पर
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार आरोपी से जुड़े नेटवर्क ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठग गिरोहों को उपलब्ध कराईं। इनका इस्तेमाल कर करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।अब तक करीब ₹15.75 करोड़ की साइबर ठगी सामने आने का दावा किया गया है।जांच एजेंसी को आशंका है कि यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और नेटवर्क की पूरी जांच के बाद ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
इंदौर बना था साइबर ठगी के ऐप का बेस?
इस कार्रवाई ने इंदौर में बैठे साइबर अपराध के एक अलग नेटवर्क की तस्वीर सामने रख दी है। आमतौर पर साइबर ठगी में फोन करने वाले ठग, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग और रकम निकालने वाले गिरोह सामने आते हैं।लेकिन इस मामले में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले तकनीकी हथियार तैयार करने वाले व्यक्ति तक पुलिस पहुंची है।यही वजह है कि जांच अब केवल पंकज तक सीमित नहीं रहने वाली। पुलिस उन लोगों की तलाश भी कर रही है, जिन्होंने उससे APK खरीदीं और आगे उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया।
आपके मोबाइल में भी आ सकती है ऐसी APK
पुलिस की जांच से सामने आए इस तरीके के बाद आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है—WhatsApp या SMS के जरिए आई किसी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें।अगर कोई फाइल बैंक KYC, पेंशन, चालान, क्रेडिट कार्ड, सरकारी योजना या किसी वेरिफिकेशन के नाम पर भेजी जाए तो उस पर भरोसा न करें।
बचने के लिए याद रखें
- WhatsApp/SMS से आई APK फाइल इंस्टॉल न करें।
- बैंक KYC के नाम पर भेजे गए ऐप या लिंक पर भरोसा न करें।
- सरकारी सेवा के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत ऐप का ही इस्तेमाल करें।
- बैंक अधिकारी बनकर कोई फोन करे तो उसकी पहचान स्वतंत्र रूप से बैंक के आधिकारिक नंबर से सत्यापित करें।
- QR कोड पर पैसे भेजने या कोई अनजान ऐप इंस्टॉल करने से पहले पूरी तरह जांच करें।
साइबर ठगी का नया चेहरा
यह मामला सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध के बदलते तरीके की तस्वीर भी सामने लाता है। अब ठगों को खुद तकनीकी ऐप बनाने की जरूरत नहीं- ऐसे लोग उनके लिए फर्जी ऐप तैयार कर उपलब्ध करा रहे हैं। इंदौर से पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के बाद अब पुलिस की नजर उन साइबर गिरोहों तक पहुंचने पर है, जिन्होंने इन APK फाइलों का इस्तेमाल किया। 2,905 APK, 9,673 संभावित पीड़ित और 15.75 करोड़ की सामने आई ठगी- इन आंकड़ों ने साइबर अपराध के उस नेटवर्क की गंभीरता जरूर उजागर कर दी है, जिसका अगला सिरा अब देशभर के ठग गिरोहों तक पहुंच सकता है।
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