हेमंत शर्मा, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर नगर निगम सवालों के घेरे में है। शहर में पिछले तीन दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। कई इलाकों में कचरा जमा होने और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के दावे किए जा रहे हैं। इसी बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। एक इलाके में करीब 24 घंटे तक कचरा और बदबू से रहवासी परेशान रहे। लोग कचरे के ढेर के पास से गुजरने को मजबूर थे। लेकिन जैसे ही कचरे के बीच महापौर की तस्वीर वाला पोस्टर/फोटो नजर आया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उसके बाद नगर निगम हरकत में आया। बताया जा रहा है कि निगम अधिकारियों ने आउटसोर्स कर्मचारियों को भेजकर कचरा उठवा दिया। यानी सवाल अब यह है कि सफाई के लिए शिकायत और इंतजार जरूरी है या फिर महापौर की तस्वीर कचरे में पहुंचना जरूरी है?

वीडियो वायरल हुआ तो 24 घंटे का कचरा चंद घंटों में साफ!

रहवासी लंबे समय से कचरे और बदबू की परेशानी झेल रहे थे। सड़क किनारे पड़ा कचरा लोगों के लिए परेशानी बना हुआ था। लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही तस्वीर बदल गई। निगम का अमला पहुंचा और कचरा हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई। अब स्थानीय लोगों के बीच यही चर्चा है कि अगर वीडियो वायरल नहीं होता तो क्या कचरा इसी तरह पड़ा रहता? क्या आम लोगों की शिकायतों पर इतनी तेजी से कार्रवाई नहीं हो सकती? और क्या सोशल मीडिया पर मामला आने के बाद ही निगम अधिकारियों को शहर की सफाई व्यवस्था दिखाई देती है?

एक तरफ हड़ताल, दूसरी तरफ कचरे के ढेर

इंदौर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पिछले तीन दिनों से जारी है। कर्मचारी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में अनियमित और आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों को नियमित करना भी शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण की मांग उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हड़ताल के कारण शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।

‘विकसित भारत’ सभा के बाहर भी सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन

सफाई कर्मचारियों का आंदोलन अब कार्यक्रमों तक भी पहुंच गया है। ‘विकसित भारत’ संकल्प सभा के बाहर बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। कर्मचारियों ने नियमित करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि जब वे वर्षों से सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा?

निगम पर आउटसोर्स कर्मचारियों से सफाई कराने का आरोप

हड़ताल के बीच एक और सवाल उठ रहा है कि जब नियमित सफाई कर्मचारी आंदोलन पर हैं, तो नगर निगम किन कर्मचारियों के जरिए सफाई व्यवस्था संभाल रहा है? आरोप है कि कई स्थानों पर आउटसोर्स कर्मचारियों को सफाई के लिए लगाया जा रहा है। यही वजह है कि कर्मचारियों का आंदोलन और निगम की सफाई व्यवस्था दोनों आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कचरे के वीडियो

हड़ताल के बीच शहर के अलग-अलग इलाकों से कचरा जमा होने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं। सवाल यह है कि जो शहर स्वच्छता के मॉडल के तौर पर देशभर में अपनी पहचान बना चुका है, वहां सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कुछ ही दिनों में व्यवस्था इस तरह प्रभावित क्यों होने लगी? क्या निगम के पास हड़ताल जैसी स्थिति से निपटने की कोई प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है?

महापौर की तस्वीर ने खोल दी व्यवस्था की पोल?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे तीखा पहलू यही है कि आम रहवासी कचरे और बदबू के बीच परेशान रहे, लेकिन जैसे ही महापौर की तस्वीर कचरे में डालकर कांग्रेस ने प्रदर्शन किया 24 घंटे का कचरा चंद घंटे में साफ हो गया।

स्वच्छता के दावों के बीच असली परीक्षा

इंदौर की पहचान उसकी सफाई व्यवस्था से जुड़ी है। ऐसे में शहर में कचरे के ढेर और सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच पैदा हुई स्थिति नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है। कर्मचारी नियमितीकरण की मांग पर अड़े हैं और निगम को शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि सफाई व्यवस्था किसी एक कर्मचारी, अधिकारी या वायरल वीडियो के भरोसे नहीं चल सकती। कचरा उठाने के लिए महापौर की तस्वीर का कचरे में पहुंचना जरूरी क्यों पड़ा? यही सवाल अब इंदौर की सफाई व्यवस्था और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।

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