हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण पर कांग्रेस ने दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के छात्रों के गूंज कार्यक्रम के लिए रीजनल पार्क के सामने स्थित मैदान का इस्तेमाल करने पर 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क वसूला गया, जबकि विजय नगर चौराहे पर भाजपा के कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल हुए मैदान का कोई शुल्क नहीं लिया गया। करीब दो घंटे चले प्रदर्शन के बाद प्राधिकरण के सीईओ परीक्षित झाड़े ने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात कर शुल्क नहीं लेने की वजह स्पष्ट की।

दरअसल, इंदौर विकास प्राधिकरण के कार्यालय पर कांग्रेस ने मैदानों के उपयोग के लिए शुल्क वसूलने की प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी के छात्रों के गूंज कार्यक्रम के लिए रीजनल पार्क के सामने स्थित खाली मैदान का उपयोग करने पर 14 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूली गई थी। वहीं, कुछ दिन पहले विजय नगर चौराहे पर प्राधिकरण के खाली मैदान में भारतीय जनता पार्टी के संकल्प ज्योति अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया गया। 

कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने लगने वाली पटाखा दुकानों के लिए मैदान के व्यावसायिक उपयोग पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि प्राधिकरण स्पष्ट करे कि अलग-अलग आयोजनों के लिए शुल्क निर्धारित करने का आधार क्या है और इस मामले में अलग-अलग नियम क्यों अपनाए जा रहे हैं।

वहीं करीब दो घंटे तक चले धरना प्रदर्शन के बाद प्राधिकरण के सीईओ परीक्षित झाड़े प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करने पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विजय नगर चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम मुख्यमंत्री के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी शासकीय कार्यक्रम था, इसलिए उसका शुल्क नहीं लिया जा सकता था। वहीं, रीजनल पार्क के सामने पटाखा दुकानों के लिए निर्धारित शुल्क भूमि की उपयोगिता और उपयोग के आधार पर लिया जाता है। सीईओ के मुताबिक, दुकानदारों ने निर्धारित शुल्क जमा कर दिया है। पिछले वर्ष का बकाया शुल्क भी जमा कराया गया है।

गांधी प्रतिमा के नीचे सफाई कर्मियों का विरोध प्रदर्शन, कराया मुंडन

इंदौर के रीगल चौराहे पर गांधी प्रतिमा के नीचे सफाईकर्मियों का विरोध प्रदर्शन सामने आया है। सफाईकर्मी यहां मुंडन करवाकर अपना विरोध जता रहे हैं। वाल्मीकि सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कल्याणे का आरोप है कि सफाईकर्मियों पर दबाव बनाकर हड़ताल खत्म कराई गई। एफआईआर दर्ज कराने और काम बंद कराने की धमकी देकर कर्मचारियों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों की मांग सुनने वाला कोई नहीं है, इसलिए श्राद्ध पक्ष में मुंडन करवाकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। अब सफाईकर्मी कल से आमरण अनशन शुरू करने की तैयारी में हैं।

इंदौर में सफाईकर्मियों का विरोध एक बार फिर सामने आया है। शहर के रीगल चौराहे पर गांधी प्रतिमा के नीचे सफाईकर्मी मुंडन करवाकर अपना विरोध जता रहे हैं। सफाईकर्मियों की इस कार्रवाई को लेकर वाल्मीकि सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कल्याणे ने अपनी बात रखी है।संतोष कल्याणे का आरोप है कि सफाईकर्मियों पर दबाव बनाकर उनकी हड़ताल खत्म कराई गई। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों को एफआईआर दर्ज कराने और काम बंद करने की धमकी दी गई, जिसके बाद हड़ताल समाप्त कराई गई।

कल्याणे ने कहा कि सफाईकर्मियों की मांगों को सुनने वाला कोई नहीं है। इसी नाराजगी के चलते कर्मचारी श्राद्ध पक्ष में मुंडन करवाकर विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि सफाईकर्मियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
वहीं, अब सफाईकर्मियों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की है। जानकारी के मुताबिक, कर्मचारी कल से आमरण अनशन पर बैठेंगे। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सफाईकर्मियों की मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और आंदोलन को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

UPI शुल्क पर व्यापारियों की चेतावनी

इंदौर में UPI भुगतान पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को लेकर व्यापारियों ने सरकार को खुली चेतावनी दी है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े 125 व्यापारिक संगठनों ने फैसला लिया है कि अगर UPI पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो दुकानों से QR कोड हटाकर नकद कारोबार की ओर कदम बढ़ाए जाएंगे। शुक्रवार को आयोजित बैठक में व्यापारियों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। चेम्बर्स के पदाधिकारी अगले पांच दिनों तक शहर के अलग-अलग बाजारों में पहुंचकर व्यापारियों को जागरूक करेंगे। इससे पहले 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ के जरिए भी व्यापारी अपना विरोध जता चुके हैं। राजवाड़ा के कपड़ा व्यापारियों के साथ खास बातचीत की हमारे संवाददाता हेमंत शर्मा ने

छात्रों के प्रदर्शन में पहुंचे पूर्व मंत्री

इंदौर में टेंट उखाड़े जाने के बाद भी छात्रों का प्रदर्शन जारी है। तांत्या मामा भील चौराहे पर पिछले करीब एक हफ्ते से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने कांग्रेस के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा पहुंचे। छात्रों ने आरोप लगाया कि कल पुलिसकर्मियों ने उनके टेंट और सिर पर बनाई गई अस्थायी छत को हटा दिया। छात्रों के समर्थन में पहुंचे सज्जन सिंह वर्मा ने उन्हें धूप से बचने के लिए छाते दिए और हर परिस्थिति में साथ देने का भरोसा दिलाया। वहीं, उन्होंने बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए प्रदर्शन जारी रखने की बात कही।

इंदौर के तांत्या मामा भील चौराहे पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में पिछले करीब एक हफ्ते से धरने पर बैठे छात्रों के बीच कांग्रेस के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि कल पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर उनके टेंट और सिर पर बनाई गई अस्थायी छत को हटा दिया। छात्रों का कहना है कि वे लगातार पुलिस से सहयोग की मांग करते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। छात्रों के समर्थन में पहुंचे सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें धूप से बचाने के लिए छाते वितरित किए। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिंदगी कीमती है, इसलिए उन्हें धूप में बैठकर प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। 

उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि वे उनके लिए छाया की व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे और कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। सज्जन सिंह वर्मा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे बच्चों के साथ झूमाझटकी की गई और उनके सिर से छत हटा दी गई। उन्होंने कहा कि रात को ग्रामीण क्षेत्र के दौरे से लौटते समय उन्होंने बच्चों के प्रदर्शन का वीडियो देखा था, जिसके बाद वे उनसे मिलने पहुंचे। 

सज्जन वर्मा ने राहुल गांधी के वोट चोर गद्दी छोड़ो आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि छात्र भी मतदाता सूची और SIR के मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। वर्मा ने दावा किया कि पुलिस और सरकार की कार्रवाई के बावजूद छात्रों का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहेगा। 

उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी की। ट्रेनों के लगातार निरस्त होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी पीछे हटने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो 200 किलोमीटर पैदल चलकर भी जाएंगे।वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रा सेजल पटेल ने आरोप लगाया कि कल वे पुलिसकर्मियों से सहयोग की मांग करते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। छात्रा के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी भी की गई। फिलहाल छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं। अब देखना होगा कि छात्रों की मांगों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

इंदौर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन निरस्त

इंदौर से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों के अचानक निरस्त होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई। बड़ी संख्या में यात्री इंदौर रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेनों के रद्द होने पर विरोध जताया। कई यात्रियों ने लंबे समय पहले अपने सफर की प्लानिंग की थी, तो कुछ यात्री बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद दिल्ली जाने वाले थे। लेकिन अचानक ट्रेनें निरस्त होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए प्लेटफॉर्म पर सहायता केंद्र बनाए और टिकटों का रिफंड देना शुरू कर दिया। रेलवे का कहना है कि निरस्त ट्रेनों के टिकट पर किसी तरह का कैंसिलेशन चार्ज नहीं काटा जाएगा।

इंदौर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब दिल्ली जाने वाली ट्रेनें अचानक निरस्त होने की जानकारी यात्रियों को मिली। बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन पहुंचे थे, लेकिन ट्रेनें रद्द होने से उनका सफर अधर में लटक गया। इसके बाद यात्रियों ने रेलवे स्टेशन पर विरोध जताया और अपनी नाराजगी जाहिर की।

बताया जा रहा है कि इंदौर से दिल्ली जाने वाली तीन ट्रेनों के निरस्त होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने काफी समय पहले अपने सफर की योजना बनाई थी और उसी हिसाब से टिकट बुक कराए थे। कुछ यात्री बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए उज्जैन आए थे। दर्शन के बाद उन्हें इंदौर से ट्रेन पकड़कर दिल्ली जाना था, लेकिन ट्रेन निरस्त होने से उनकी आगे की यात्रा प्रभावित हो गई।अचानक ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों के सामने सफर को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई। स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्था को लेकर विरोध जताया। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की चिंता सताने लगी।

वहीं, यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे ने स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सहायता केंद्र शुरू किए। यहां ऑफलाइन टिकट लेने वाले यात्रियों को रिफंड देना शुरू किया गया। वहीं, ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के रिफंड की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से की गई।

जानकारी के मुताबिक, ऑनलाइन टिकटों का रिफंड संबंधित यात्रियों के बैंक खातों में पहुंच गया।रेलवे का कहना है कि जिन ट्रेनों को निरस्त किया गया है, उनके टिकट का पूरा रिफंड दिया जाएगा और किसी भी तरह का कैंसिलेशन चार्ज नहीं काटा जाएगा। फिलहाल अचानक ट्रेनें निरस्त होने से यात्रियों को हुई परेशानी के बीच रेलवे की ओर से रिफंड और सहायता की व्यवस्था की गई है।

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