हेमंत शर्मा, इंदौर। दशहरा आते ही देशभर में रावण दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। जगह-जगह विशाल पुतले बनाए जाते हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में उनका दहन किया जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर में रावण दहन को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परंपरा, आस्था और वैज्ञानिक सोच के बीच बहस छेड़ दी है। इंदौर के परदेशीपुरा स्थित रावण मंदिर के पुजारी महेश गौहर ने रावण दहन पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पुजारी का दावा है कि देशभर में रावण दहन किए जाने के कारण पानी की किल्लत हो रही है और इंदौर में बारिश नहीं हो रही। हाईकोर्ट पर लगाई गई याचिका में पुराने ग्रंथों को भी आधार बनाया गया है, जिसमें कहीं रावण दहन का उल्लेख नहीं किया गया है।

रावण दहन पर रोक की मांग, बारिश न होने की बताई वजह

पुजारी महेश गौहर की याचिका ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रावण दहन जैसी सदियों पुरानी परंपरा पर कानूनी रोक लगाई जा सकती है? वातावरण दूषित हो रहा है ऐसे आधार बनाकर याचिका को लगाया गया है, जिसमें लगातार सुनवाई जारी है। इसके साथ ही पुजारी की तरफ से दावा किया गया है कि बारिश नहीं हो रही है जिसकी वजह भी अगर रावण दहन पर रोक लगेगी तो अच्छी बारिश और अच्छा वातावरण रहेगा।

इंदौर में रावण की पूजा, दशहरे पर होता है विशेष हवन

परदेशीपुरा में स्थित यह मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है। जहां विजयादशमी पर देशभर में रावण के पुतलों का दहन किया जाता है, वहीं इस मंदिर में रावण की पूजा-अर्चना होती है। विजयादशमी के अवसर पर यहां विशेष हवन और पूजन किया जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालु यहां मन्नत का धागा बांधकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। इंदौर के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण 10 अक्टूबर 2010 को पूरा हुआ था और इसका उद्घाटन भी सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर किया गया था। मंदिर की यह परंपरा इसे इंदौर के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग बनाती है।

26 सितंबर को हुई सुनवाई, अब अगली तारीख का इंतजार

रावण दहन पर रोक लगाने से जुड़ी इस याचिका पर 26 सितंबर को सुनवाई होने की जानकारी दी गई है। अब करीब तीन महीने बाद अगली सुनवाई होने की बात सामने आई है। हालांकि, अगली सुनवाई की सटीक तारीख और अदालत की ओर से दिए गए आदेश की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इस मामले में सबसे अहम बात यह होगी कि याचिका में क्या मांग रखी गई है, अदालत ने अब तक क्या निर्देश दिए हैं और आगे इस पर क्या कानूनी रुख अपनाया जाता है। केवल याचिका दायर होने से रावण दहन पर रोक लगना तय नहीं माना जा सकता।

आस्था बनाम परंपरा: अदालत में पहुंचेगा दशहरे का सवाल?

रावण दहन को देश के बड़े हिस्से में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। वहीं इंदौर के इस मंदिर में रावण की पूजा की जाती है और पुजारी ने दहन पर रोक की मांग के साथ कानूनी लड़ाई शुरू की है। एक ओर धार्मिक मान्यताएं हैं, दूसरी ओर सदियों से चली आ रही दशहरे की परंपरा और मौसम को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण। ऐसे में यह मामला सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि व्यक्तिगत धार्मिक मान्यता के आधार पर किसी व्यापक परंपरा पर रोक लगाने की मांग को अदालत किस नजरिए से देखेगी। अब नजर अगली सुनवाई पर है। क्या पुजारी की याचिका पर अदालत कोई ठोस निर्देश देगी, या रावण दहन पर रोक की मांग कानूनी कसौटी पर आगे नहीं बढ़ पाएगी? इसका जवाब अदालत की कार्यवाही और आदेश से ही स्पष्ट होगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m