हेमंत शर्मा, इंदौर। एमपी के इंदौर में गर्मी के मौसम के बीच आइसक्रीम की क्वालिटी पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने शहर की आइसक्रीम निर्माण इकाइयों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की। इस दौरान दो फैक्ट्रियों से कुल 10 नमूने लिए गए, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
बिना लाइसेंस बनाई जा रही थी आइसक्रीम
सबसे बड़ी कार्रवाई राजाराम नगर स्थित चैंपियंस आइसक्रीम एंड फ्रोजन फूड पर हुई। जांच में पाया गया कि यहां बिना वैध लाइसेंस के आइसक्रीम बनाई जा रही थी। पैकेजिंग पर जरूरी जानकारी अधूरी थी, रॉ मटेरियल गंदगी में रखा था और जंग लगे सांचे इस्तेमाल हो रहे थे। इतना ही नहीं, निर्माण में इस्तेमाल पानी की जांच रिपोर्ट भी मौजूद नहीं मिली।
गंदगी के बीच तैयार की जा रही थी आइसक्रीम
टीम ने मौके से वनीला फ्रोजन डेजर्ट, केसर पिस्ता कुल्फी, मावा और चॉकलेट पेस्ट के 4 सैंपल जब्त किए। हालात इतने खराब पाए गए कि प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से इस यूनिट का निर्माण कार्य बंद करा दिया। वहीं, छोटा बांगड़दा स्थित रुद्राक्ष आइसक्रीम यूनिट में भी गड़बड़ियों का अंबार मिला। यहां बिना लेबल के फ्लेवर का इस्तेमाल हो रहा था और गंदगी के बीच आइसक्रीम तैयार की जा रही थी। स्टोरेज भी पूरी तरह अव्यवस्थित मिला।
बिना लेबल वाले फ्लेवर नष्ट कराए
टीम ने यहां से जांच के लिए 6 सैंपल (आइसक्रीम के 5 और टूटी-फ्रूटी का 1) लिए। मौके पर बिना लेबल वाले फ्लेवर नष्ट कराए गए और संचालक को नोटिस जारी करने की तैयारी की गई है। कलेक्टर ने साफ कहा है कि खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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