हेमंत शर्मा, इंदौर। दीपावली के त्योहार पर पूजा सामग्री बेचने के लिए दी गई अस्थायी अनुमति अब राजबाड़ा क्षेत्र में मनमाने कारोबार का जरिया बनती नजर आ रही है। अनुमति दीये, बाती और पूजन सामग्री की थी, लेकिन सड़क और फुटपाथ पर जूते-चप्पल से लेकर क्रॉकरी, फोटो फ्रेम, कारपेट, चादर और दरियां तक का बाजार सज गया। इतना ही नहीं, ऐतिहासिक राजबाड़ा की दीवार में छेद कर मोटी कील ठोककर कपड़े टांगने का मामला सामने आने के बाद नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं राजबाड़ा शहर की ऐतिहासिक पहचान है और स्मार्ट सिटी क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा भी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस जगह के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहां ऐतिहासिक दीवार को नुकसान पहुंचाने वालों पर आखिर निगरानी कौन कर रहा है?
दीये-बाती की अनुमति, लेकिन सड़क पर बिक रहा हर सामान!
त्योहारी सीजन में नगर निगम प्रशासन ने अस्थायी रूप से पूजा सामग्री बेचने की अनुमति दी थी। लेकिन अब आरोप है कि इसी अनुमति की आड़ में कई तरह के दूसरे सामानों की दुकानें सड़क और फुटपाथ तक फैल गई हैं। जूते-चप्पल, क्रॉकरी, कारपेट, चादर और अन्य सामानों की बिक्री से बाजार क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हो रही है। पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं स्थायी दुकानदारों तक ग्राहकों की पहुंच भी मुश्किल हो रही है।सवाल यह है कि क्या इन दुकानों को भी नगर निगम से अनुमति मिली है, या फिर अनुमति की शर्तों को ताक पर रखकर सड़क पर अस्थायी बाजार खड़ा कर दिया गया?
राजबाड़ा की दीवार में कील ठोकने पर कौन करेगा कार्रवाई?
मामले का सबसे गंभीर पहलू ऐतिहासिक राजबाड़ा की दीवार को नुकसान पहुंचाने का है। रविवार को दीवार में छेद कर मोटी कील ठोककर उस पर कपड़े टांगने की बात सामने आई। ऐतिहासिक धरोहर को इस तरह व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए नुकसान पहुंचाना संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। एक तरफ शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने और संवारने की बात होती है, दूसरी तरफ उसी धरोहर की दीवारों में कीलें ठोकी जा रही हैं।
रिमूवल अमला कहां है?
सड़क और फुटपाथ पर बढ़ते अतिक्रमण के बीच अब नगर निगम के रिमूवल विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। त्योहार के नाम पर कारोबार का अवसर देना जरूरी हो सकता है, लेकिन अनुमति की आड़ में सड़क और फुटपाथ पर मनमाने तरीके से बाजार फैलने देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। राजबाड़ा जैसे संवेदनशील और व्यस्त इलाके में नियमों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा? ऐतिहासिक दीवार को हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अब निगम प्रशासन के सामने बड़ा सवाल है KF क्या पूजा सामग्री की अनुमति के नाम पर सड़क पर फैलते इस बाजार और राजबाड़ा की दीवार को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई होगी, या फिर ऐतिहासिक धरोहर और व्यवस्था दोनों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?
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