IIT दिल्ली में 31 वर्षीय छात्र की मौत के मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप सकी है। कमेटी को अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट 30 सितंबर तक संस्थान को सौंपनी थी, लेकिन निर्धारित समयसीमा तक रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी। रिपोर्ट तय समय पर नहीं आने के बाद जांच कमेटी अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है। इसके लिए संस्थान से मंजूरी लेनी होगी। मंजूरी मिलने के बाद कमेटी को जांच पूरी करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए नई समयसीमा दी जा सकती है। घटना के बाद IIT दिल्ली की ओर से मामले की जांच के लिए पांच सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी को घटना से जुड़े तथ्यों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
क्यों हुई जांच रिपोर्ट में देरी?
जांच कमेटी से जुड़े सदस्यों के अनुसार, कुछ छात्रों के बयान दोबारा दर्ज करने की जरूरत पड़ी। इसके चलते जांच का दायरा थोड़ा बढ़ गया और रिपोर्ट तैयार करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। कमेटी के मुताबिक, सभी छात्रों के बयान अब दर्ज किए जा चुके हैं। फिलहाल इन बयानों और जांच के दौरान जुटाई गई अन्य जानकारियों को एक साथ संकलित किया जा रहा है। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर जमा की जाएगी। कमेटी ने बताया कि पूरी जानकारी को कंपाइल कर रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। ऐसे में रिपोर्ट के लिए तय समयसीमा बढ़ाए जाने की संभावना है
क्या था मामला?
23 अगस्त को IIT दिल्ली परिसर में 31 वर्षीय छात्र की मौत हो गई थी। छात्र फिजिक्स से एमएससी की पढ़ाई कर रहा था। घटना के बाद परिसर में कई दिनों तक छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की थी। छात्रों की मांग के बाद IIT दिल्ली प्रशासन ने 25 अगस्त को पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी को घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी।
कमेटी के चेयरमैन ने खुद को किया अलग
जांच कमेटी के गठन के शुरुआती चरण में ही इसके चेयरमैन बनाए गए उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने निजी कारणों का हवाला देते हुए कमेटी से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद कमेटी ने अपनी जांच जारी रखी। अब छात्रों के बयान समेत अन्य जानकारियां जुटाने के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
कमेटी का दोबारा हुआ था पुनर्गठन
पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के कमेटी से अलग होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज मुक्ता गुप्ता को जांच कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। इसके साथ ही कमेटी के पैनल का पुनर्गठन किया गया और रिपोर्ट सौंपने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया। कमेटी निर्धारित समय में 14 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप सकी। इसके बाद कमेटी ने जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। इसके बाद रिपोर्ट सौंपने की नई डेडलाइन 30 सितंबर निर्धारित की गई।
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