Business Desk – Investment Tips 2026 : जब करोड़ों की संपत्ति की बात होती है तो पहली सोच यही आती है कि कमाई बहुत ज्यादा रही होगी या बड़ी विरासत मिली होगी। लेकिन अहमदाबाद के 51 वर्षीय ग्रिजेश अगल की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने 1998 में उदयपुर से सिर्फ 2,500 रुपए महीने की सैलरी पर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर करियर शुरू किया था। आज उनके पास म्यूचुअल फंड, शेयर, रियल एस्टेट और सोने को मिलाकर 6 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है।

इस सफर में बाजार के उतार-चढ़ाव भी आए। 2008 की मंदी में उनका निवेश पोर्टफोलियो करीब 70% गिरा तो उन्होंने SIP रोक दी थी। लेकिन 2020 में कोरोना संकट के दौरान पोर्टफोलियो 90 लाख से घटकर 65 लाख रुपए रह गया, तब उन्होंने निवेश जारी रखा। इस अनुभव ने उनके निवेश के तरीके को काफी बदल दिया।
- सबसे बड़ा निवेश आपका करियर है
ग्रिजेश राजस्थान के सलूंबर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। बी.फार्मा और MBA करने के बाद उन्होंने फार्मा सेल्स में नौकरी शुरू की। 2004 में अहमदाबाद आने के बाद उन्हें कारोबार और शेयर बाजार की बेहतर समझ मिली।
2009 में एरिस लाइफसाइंसेज जॉइन करने पर उनका सालाना पैकेज 6 लाख रुपए हुआ। बाद में यह बढ़कर 9 लाख, 15 लाख और 21 लाख रुपए तक पहुंचा। उनकी संपत्ति सिर्फ निवेश से नहीं बनी। जैसे-जैसे उनकी कमाई बढ़ी, उन्होंने निवेश की रकम भी बढ़ाई।
- जल्दी निवेश शुरू करें, लेकिन क्षमता के हिसाब से
2006 में 15,000 रुपए की सैलरी पर ग्रिजेश ने 20,000 रुपए एकमुश्त और 7,000 रुपए की मासिक SIP शुरू की। यह उनकी सैलरी का करीब 47% था। लेकिन उस समय उन पर होम लोन, कार लोन और परिवार की जिम्मेदारियां भी थीं। 2008 की मंदी में पोर्टफोलियो करीब 70% गिरा तो आर्थिक दबाव के चलते उन्हें SIP रोकनी पड़ी। इससे सीख मिलती है कि जल्दी निवेश शुरू करना जरूरी है, लेकिन निवेश की ऐसी योजना बनाना ज्यादा जरूरी है जिसे मुश्किल समय में भी जारी रखा जा सके।
- कर्ज चुकाएं और EMI का पैसा निवेश में लगाएं
ग्रिजेश ने पहले अपना होम लोन खत्म करने पर ध्यान दिया। अक्टूबर 2010 में पहला होम लोन चुकाने के बाद दिसंबर 2011 में उन्होंने फिर 7,000 रुपए की SIP शुरू की। 2020 में कोरोना संकट के दौरान उन्होंने दूसरा होम लोन भी चुका दिया, जिसकी रकम 20 लाख रुपए थी। इसके बाद EMI में जाने वाला पैसा उन्होंने SIP बढ़ाने में लगा दिया। यानी कर्ज खत्म होने के बाद खर्च बढ़ाने के बजाय उन्होंने उसी पैसे को संपत्ति बनाने में लगाया।
- सैलरी बढ़े तो SIP भी बढ़ाएं
ग्रिजेश की SIP 7,000 रुपए से बढ़कर 15,000, फिर 30,000, 50,000 और आखिर में 57,000 रुपए महीने हो गई। 2016 में जब उनका CTC 15 लाख रुपए हुआ, तब बचत खाते में पड़े करीब 25 लाख रुपए को भी उन्होंने एकमुश्त निवेश कर दिया।
उनका तरीका सीधा था—कमाई बढ़ी, बचत बढ़ी और उसके साथ निवेश भी बढ़ता गया।
- बचत खाते में ज्यादा पैसा बेकार न पड़ा रहने दें
2016 में ग्रिजेश के बचत खाते में करीब 25 लाख रुपए पड़े थे। निवेश की समीक्षा के दौरान उन्होंने इस अतिरिक्त रकम को भी निवेश करने का फैसला किया। हालांकि आपातकालीन जरूरतों के लिए पैसा अलग रखना जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक बिना किसी उद्देश्य के बड़ी रकम बचत खाते में रखने के बजाय बेहतर निवेश विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
- बाजार गिरने पर असली परीक्षा होती है
2008 में नुकसान देखकर SIP रोकने वाले ग्रिजेश ने 2020 में वही गलती नहीं दोहराई। कोरोना संकट के दौरान उनका पोर्टफोलियो 90 लाख से गिरकर 65 लाख रुपए रह गया, लेकिन उन्होंने SIP जारी रखी। 2011 के बाद से उन्होंने म्यूचुअल फंड से पैसा नहीं निकाला। उनके मुताबिक, कुल 1.34 करोड़ रुपए के निवेश से म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो बढ़कर करीब 2.78 करोड़ रुपए हो गया।
- हर वित्तीय फैसला सही नहीं होता
ग्रिजेश के सफर में कुछ गलत फैसले भी रहे। होम लोन जल्दी चुकाने पर ध्यान देने के कारण वह कंपनी के ESOP का विकल्प नहीं चुन पाए। उनके मुताबिक, आज उन ESOP की कीमत करीब 1.40 करोड़ रुपए होती। 2008 में SIP रोकना भी उनके लिए एक बड़ी सीख रहा। इसके बावजूद लगातार बचत और निवेश से उन्होंने बड़ा फंड तैयार किया। आज उनके पास 3 फ्लैट, 1 प्लॉट, 200 ग्राम सोना, 2.78 करोड़ रुपए के म्यूचुअल फंड और 37.9 लाख रुपए के शेयर हैं। इसके अलावा FD और PPF में भी निवेश है। 2021 में उन्होंने अपनी फार्मा कंपनी शुरू की। अब उनका लक्ष्य 58 साल की उम्र तक 7.5 से 10 करोड़ रुपए का फंड तैयार करना है।
स्टेप-अप SIP क्या होती है?
स्टेप-अप SIP में निवेशक तय समय के बाद अपनी SIP की रकम बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, हर साल SIP में 5% या 10% की बढ़ोतरी की जा सकती है। सैलरी बढ़ने के साथ SIP बढ़ाने से निवेश की रकम और चक्रवृद्धि का फायदा दोनों बढ़ते हैं। ग्रिजेश की कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि संपत्ति बनाने के लिए शुरुआत में बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं। कमाई बढ़ाना, कर्ज घटाना, बचत करना और समय के साथ निवेश बढ़ाते रहना ज्यादा अहम है।



