Business Desk – वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. कई समय से यह कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं. इसका असर अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों के जरिए आम लोगों की जेब तक पहुंच चुका है.

तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है, जिसका असर हर दिन की जिंदगी पर साफ दिख रहा है. सुबह के सफर से लेकर घर के खर्च तक.

ट्रांसपोर्टेशन महंगा, हर चीज की कीमत बढ़ी

मई महीने में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की है. इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ा है जो रोज निजी वाहनों से दफ्तर या काम पर जाते हैं. ईंधन महंगा होने से सिर्फ यात्रा खर्च ही नहीं बढ़ा, बल्कि इसका असर माल ढुलाई पर भी पड़ा है. ट्रांसपोर्ट महंगा होने की वजह से बाजार में आने वाले फल, सब्जियां और रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतें भी बढ़ गई हैं.

रेस्टोरेंट, होटल और यात्रा पर भी असर

महंगाई का असर अब बाहर खाने-पीने और घूमने-फिरने पर भी दिखने लगा है. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़कर नई दिल्ली में 1,700 रुपए से 3,000 रुपए से ज्यादा पहुंच गई हैं. इस वजह से होटल और रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू के दाम बढ़ा दिए हैं. वहीं एविएशन फ्यूल (ATF) महंगा होने से हवाई यात्रा भी महंगी हो गई है. कई लोगों को अपनी छुट्टियों की प्लानिंग तक बदलनी या रद्द करनी पड़ रही है.

रोजमर्रा की चीजें भी हुईं महंगी

क्रूड ऑयल का असर सिर्फ गाड़ियों या ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं है. प्लास्टिक की बोतलें, कंटेनर, कपड़े और घरों में इस्तेमाल होने वाले पेंट जैसे कई प्रोडक्ट्स पेट्रोकेमिकल्स पर निर्भर होते हैं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे इन सभी चीजों के दाम भी ऊपर चले गए हैं. इसका असर हर घर की रोजमर्रा की खरीदारी पर पड़ रहा है.

कमजोर रुपया और महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात (import) करता है. जब क्रूड ऑयल महंगा होता है तो देश का खर्च बढ़ जाता है और इसका असर रुपये की वैल्यू पर भी पड़ता है.

रुपया कमजोर होने से विदेश से आने वाले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों के पार्ट्स महंगे हो जाते हैं. इसी वजह से गैजेट्स की कीमतें भी बढ़ती जा रही हैं और उन्हें खरीदना आम लोगों के लिए और महंगा होता जा रहा है.