गगनयान मिशन की तैयारी में ISRO को बहुत बड़ी सफलता मिली है. अंतरिक्ष से लौटते वक्त सुरक्षित वापसी कराने वाले सबसे अहम पैराशूट सिस्टम का टेस्ट सफल हो गया है. भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित धरती पर वापस लाने के अभियान में एक कदम और आगे बढ़ते हुए इस टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से मुख्य पैराशूट का सफल परीक्षण किया गया.

ISRO ने गगनयान मिशन की तैयारी में एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया.

ISRO ने अंतरिक्ष यात्रियों यानी एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित धरती पर वापस लाने के क्रम में एक बड़ी सफलता हासिल की है. ISRO ने सोशल मीडिया पर बुधवार को इस बात की जानकारी शेयर की है कि उन्होंने मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित एडीआरडीई के ड्रॉप जोन में यह परीक्षण मंगलवार को किया गया.

इसरो ने आगे बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सबसे जरूरी पैराशूट सिस्टम का सफल टेस्ट IMAT-05 सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य उस मेन पैराशूट सिस्टम की परफॉर्मेंस को चेक करना था, जो अंतरिक्ष से लौटते समय गगनयान क्रू कैप्सूल की रफ्तार को धीमा करेगा और उसे सुरक्षित समुद्र में लैंड कराएगा.

इस गगनयान क्रू मॉड्यूल को धीमा करने के लिए कुल 4 अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. जब क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष से वापस लौटते समय पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते है तो उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.

गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसे ISRO विकसित कर रहा है. इस मिशन का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है.

इस महत्वपूर्ण परीक्षण के अंतर्गत मुख्य पैराशूट का नमूना एक डमी भार के साथ वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया. परीक्षण के दौरान पाया गया कि सबसे पहले पैराशूट खुलते हुए नीचे गिर रहे क्रू मॉड्यूल को स्थिर कर गति काफी कम कर दी. जिसके बाद डमी भार सुरक्षित गति से जमीन की ओर उतरा.

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