बड़े और स्थायी काम, समय, धीरज और सतत प्रयास से ही पूरे होते हैं। इसी बात को एक दूसरे अन्दाज़ में ऐसे भी कहा जाता है “Rome wasn’t built in a day” 12वीं शताब्दी की इस पुरानी फ्रांसीसी कहावत के अनुसार तेज गति से भागती दुनियाँ में सभी तत्काल सफलता चाहता है मगर सच तो यह है कि वास्तविक उपलब्धियाँ धीरे-धीरे ही आकार लेती हैं।
जब भी हम किसी निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं तो शुरुआती कठिनाइयाँ हमें हतोत्साहित और निराश कर सकती हैं। ऐसी कठिन परिस्थिति में याद रखें कि हर महान निर्माण की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है। जिस तरह एक विशाल वृक्ष छोटे बीज से विकसित होता है वैसे ही सफलता भी धीरे-धीरे मगर लगातार मेहनत, लगन और धैर्य से फलित होती है।
लम्बा समय हमें परिणाम देने के अलावा मजबूत, अनुभवी और समझदार भी बनाता है। यदि मेहनत का फल तुरंत नहीं मिल रहा है तो भी निराश होने के स्थान पर अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखते हुए निरंतर प्रयास करते रहें।
अपने चारों ओर नज़र डालिए तो पाएँगे कि हर बड़ा काम, धैर्य, समर्पण और अनुशासन के आधार स्तम्भ पर ही टिका है। समय को अपना साथी बना लीजिए सफलता स्वयं आपसे मित्रता कर लेगी। संत कबीर दास जी के एक दोहे का हिस्सा है “जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ” प्रत्यक्ष में इसका अर्थ तो यह है कि जो लोग मेहनत और साहस से प्रयास करते हैं वे ही सफलता और ज्ञान का मोती पाते हैं, जबकि डरपोक लोग किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं। हमारे प्रसंग में इसी बात को इस तरह से कह सकते हैं कि जो लोग धैर्य और साहस से प्रयास करते हैं, ही सफलता और ज्ञान का मोती पाते हैं जबकि जल्दबाज़ी करने वाले लोग वांछित परिणाम कभी नही पाते । सफलता एक यात्रा है और हर दिन का छोटा कदम ही बड़ी मंज़िल के मुहाने पर लाकर खड़ा करता।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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