इंद्रपाल सिंह, इटारसी (नर्मदापुरम)। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में किसानों का 27 घंटे बाद दोपहर साढ़े 3 बजे लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया। मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा, ‘तुलसी सिलावट जो बोलता है, वह करता है… मैं कमिटमेंट का बहुत पक्का हूं।’ जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट के इस भरोसे के बाद आखिरकार 27 घंटे से तवा नहर में चल रहा किसानों का प्रदर्शन समाप्त हो गया।
बता दें कि 154.33 करोड़ की देवरी माइक्रो सिंचाई परियोजना में देरी से नाराज आदिवासी किसान शनिवार से पथरौटा स्थित मुख्य तवा नहर में उतरकर धरने पर बैठे थे। रविवार को मंत्री से वीडियो कॉल पर चर्चा और परियोजना को आठ महीने में शुरू करने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने रविवार दोपहर साढ़े तीन बजे आंदोलन खत्म कर दिया।गौरतलब है कि केसला ब्लॉक की देवरी यानी दोंडी झुनकर माइक्रो सिंचाई परियोजना को अक्टूबर 2023 में 154.33 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। तवा बांध से पानी लिफ्ट कर करीब 35 गांवों की 10 से 12 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने की योजना है। लेकिन तीन साल बाद भी काम शुरू नहीं हुआ और परियोजना की लागत बढ़कर करीब 300 करोड़ रुपये पहुंच गई।
टेंडर प्रक्रिया में देरी से नाराज सहेली, केसला, ताकू, मोरपानी, धासाई, जालीखेड़ा, मरियारपुरा, दाउडी झुनकर और आसपास के गांवों के किसानों ने अपना गांव संगठन के बैनर तले आंदोलन शुरू किया। किसान लिखित आश्वासन मिलने तक धरना खत्म करने को तैयार नहीं थे। इस बीच जल संसाधन मंत्री ने मुख्य अभियंता आर.आर. मीणा को मौके पर भेजा। उन्होंने बताया कि पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति और वनभूमि संबंधी मंजूरियों के कारण टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है।
किसानों की मांग पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राजेंद्र सिंह ठाकुर ने वीडियो कॉल के जरिए मंत्री तुलसी सिलावट और प्रदर्शनकारियों के बीच चर्चा कराई। इसमें अपना गांव संगठन के दुर्गेश धुर्वे, किसान नेता बाबू चौधरी और मुख्य अभियंता आर.आर. मीणा शामिल हुए। किसानों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। मंत्री ने उनकी बात सुनते हुए दुर्गेश धुर्वे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल को भोपाल बुलाया और भरोसा दिया कि बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि समस्याओं का मौके पर समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ खड़ी है और परियोजना में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए तेजी से कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की ओर से परियोजना को आठ महीने में शुरू करने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद करीब 27 घंटे से जारी किसानों का प्रदर्शन समाप्त हो गया। अब किसानों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित परियोजना पर जल्द काम शुरू होगा और केसला क्षेत्र के करीब 35 गांवों की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। हालांकि, अब सबसे बड़ी चुनौती तय समयसीमा में परियोजना को जमीन पर उतारने की है।
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