भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) अपनी ऑपरेशनल क्षमता मजबूत करने की तैयारी में है। अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति की खबरों के बीच ITBP करीब दो दर्जन क्विक रिस्पॉन्स फाइटिंग व्हीकल (QRFV) खरीदने की योजना बना रही है। इसके साथ ही ड्रोन वॉरफेयर, एंटी-ड्रोन सिस्टम, विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षित बंकरों के निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।

ITBP खरीदेगी करीब 24 QRFV, क्या होगा फायदा?

ITBP की प्रस्तावित QRFV खरीद का उद्देश्य संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में जवानों की आवाजाही और त्वरित तैनाती की क्षमता बढ़ाना है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास ऊंचे पहाड़, बर्फबारी, कम तापमान और सीमित सड़क संपर्क सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती हैं।

ऐसे में क्विक रिस्पॉन्स फाइटिंग व्हीकल जरूरत पड़ने पर जवानों को तेजी से निर्धारित स्थान तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन वाहनों की वास्तविक क्षमता उनके मॉडल, सुरक्षा सुविधाओं और पहाड़ी इलाकों में संचालन की योग्यता पर निर्भर करेगी।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से मजबूत होगी निगरानी

ITBP के आधुनिकीकरण में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक को भी अहम माना जा रहा है। प्रत्येक बॉर्डर गार्डिंग बटालियन में ड्रोन प्लाटून स्थापित करने की योजना से दुर्गम क्षेत्रों की निगरानी और परिस्थितियों का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, ड्रोन निर्माण की घरेलू क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में जरूरत के मुताबिक तकनीक उपलब्ध कराने और बाहरी निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।

2027 तक जवानों को विशेष ट्रेनिंग देने का लक्ष्य

ITBP के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 2027 के अंत तक पूरे बल को STRIKE ट्रेनिंग देने का लक्ष्य बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 10 हजार जवानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। इसका उद्देश्य जवानों की शारीरिक क्षमता, अनुशासन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाना है।

बंकरों और सुरक्षित आश्रय स्थलों पर भी जोर

सीमा पर तैनात जवानों को अत्यधिक ठंड और प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने के लिए सुरक्षित आश्रय स्थलों और भूमिगत बंकरों की क्षमता बढ़ाने की योजना है। जानकारी के मुताबिक, ITBP की 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किया जा चुका है।

भारत-चीन सीमा पर क्यों अहम है यह आधुनिकीकरण?

QRFV, ड्रोन, विशेष प्रशिक्षण और बेहतर बुनियादी ढांचा ITBP की समग्र परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव खरीद प्रक्रिया, बजट मंजूरी, तैनाती और दुर्गम क्षेत्रों में उनकी उपयोगिता पर निर्भर करेगा।

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